संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में इजरायल (Israel) ने एकबार फिर अपनी ताकत दिखाई है। राष्ट्र के राजदूत गिलाद एर्दन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) की वार्षिक रिपोर्ट को फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट की सही जगह कूड़ेदान है और इसका कोई उपयोग नहीं है। उन्होंने दलील दी कि यह रिपोर्ट इजरायल के खिलाफ है और पक्षपाती है। इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने महासभा में एक विशेष बैठक बुलाई थी, जहां इसके अध्यक्ष मिशेल बाचेलेट ने सभी सदस्य देशों के सामने वार्षिक रिपोर्ट पेश की थी। लेकिन इजरायल ने अपना रवैया सख्त रखा है।

इस रिपोर्ट में गाजा पर इजरायल के कब्जे के हमले के बाद गठिक की गई एक जांच समिति के निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए थे, जिसमें 67 बच्चों, 40 महिलाओं और 16 बुजुर्गों सहित 260 फिलिस्तीनियों की मौत हो बताई गई थी। इस UNHRC की रिपोर्ट में गाजा पर क्रूर हमलों के लिए इजरायल की निंदा और आलोचना की गई थी।

महासभा में विशेष सुनवाई के दौरान ही मानवाधिकार परिषद के अध्यक्ष ने सभी सदस्य देशों को जांच कमेटी की वार्षिक रिपोर्ट पेश की थी। रिपोर्ट में हमास के साथ मई में संघर्ष के बाद स्थापित एक जांच समिति के परिणाम हैं। रिपोर्ट का बड़ा हिस्सा इजरायल की निंदा और आलोचना करता है, मगर इजरायली नागरिकों पर हमास के हमलों की उपेक्षा करता है।

इजरायल के राजदूत ने कहा कि दुख की बात है कि दुनियाभर के उत्पीड़ितों की आवाजें नहीं सुनी जा रही हैं, क्योंकि मानवाधिकार परिषद अपना समय, अपने बजट और अपने संसाधनों को बर्बाद करने पर जोर दे रही है। मेरे देश और यहां की हर तरह की स्वतंत्रता को टारगेट कर रही है। यूएनएचआरसी ने म्यांमार, अफगानिस्तान और इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष पर अपना विशेष सत्र आयोजित किया था।