इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग कर रही है, लेकिन एक जंग और है जो इजराइल और फलस्तीन के बीच चल रही है। इजराइल और फलस्‍तीन के बीच जारी यह खूनी खेल अब जंग का रूप लेता जा रहा है और इसमें दोनों ओर से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इजराइल और फलस्‍तीनी उग्रवादी गुट हमास लगातार एक-दूसरे की ओर रॉकेट से हमला कर रहे हैं और कई इमारतों को जमींदोज कर रहे हैं। इजराइल ने दावा किया है कि हमास ने उसकी ओर करीब 1500 रॉकेट दागे हैं, हालांकि, इजरायल ने भी पलटवार किया है और उसके सैकड़ों रॉकेट को हवा में ही ध्वस्त कर दिया है। इतना ही नहीं, इजराइल ने अबतक अपने रॉकेट हमले में 65 से अधिक फलीस्तीनियों को मौत के घाट उतार दिया है। इजरायली हवाई हमले में हमास के 11 शीर्ष कमांडर मारे गए हैं। लेकिन यहां हम आपको बता रहे हैं कि आखिरी क्यों ये दोनों देश लड़ रहे हैं, तो जानिए...
इजराइल का आयरन डोम है रक्षक
हमास की ओर से जब सैकड़ों रॉकेट दागे गए तो इजराइल के 'आयरन डोम' एयर डिफेंस सिस्टम ने 90 प्रतिशत मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। आयरन डोम को दुनिया का बेस्ट एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम कहा जाता है। दरअसल, इजराइल की आयरन डोम एक एयर डिफेंस सिस्टम है जिसे इजराइल की फर्मों राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स और इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका से वित्तीय और तकनीकी सहायता भी ली गई है। हाई टेक्नोलॉजी से लैस आयरन डोम एक छोटी दूरी का एयर डिफएंस सिस्टम हैं जिससे रॉकेट, मोर्टार को हवा में ही नष्ट किया जा सकता है।

2014 की लड़ाई याद आई
महज तीन दिन में दोनों शत्रुओं के बीच लड़ाई ने 2014 के उस विध्वंसक युद्ध की याद दिला दी जो 50 दिन तक चला था। इस लड़ाई ने इजराइल में दशकों बाद भयावह यहूदी-अरब हिंसा को जन्म दिया है। इजराइल ने सुबह होते ही कई हवाई हमले किए और गाजा में दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाया। बुधवार को भी हवाई हमले जारी रहे थे जिससे हवा में धुएं का गुबार बन गया। गाजा सिटी में रात को सड़कों पर वीरानी छा गई और रमजान के आखिरी दिन लोग अपने घरों के भीतर ही सिमटे रहे।

गाजा में हर पर मंडरा रहा मौत का साया
गाजा सिटी में अपनी इमारत में बम गिरने के बाद अन्य रिश्तेदारों के साथ भागकर मध्य गाजा में आए 44 वर्षीय जेयाद खत्ताब ने कहा, ''कहीं पर भी भाग नहीं सकते। कहीं पर भी छिप नहीं सकते। गाजा के उग्रवादी दिन भर इजराइल पर रॉकेट दागते रहे। गाजा के समीप दक्षिणी समुदायों में जनजीवन ठप हो गया है।  गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 65 फलस्तीनियों की मौत हो गई है जिनमें 16 बच्चे और पांच महिलाएं शामिल हैं। इस्लामी जिहाद ने सात चरमपंथियों की मौत की पुष्टि की है जबकि हमास ने एक शीर्ष कमांडर और कई अन्य सदस्यों के मारे जाने की बात कही है।

इजराइल में अब तक कितने मरे
इजराइल में कुल 7 लोग मारे गए हैं जिनमें से चार की मौत बुधवार को हुई। इनमें टैंक रोधी मिसाइल से मारा गया एक सैनिक भी शामिल है और रॉकेट हमले में मारा गया छह साल का बच्चा भी शामिल है। इजराइली सेना ने दावा किया कि हमास की बतायी संख्या से कहीं अधिक चरमपंथी मारे गए हैं। हरहाल, संयुक्त राष्ट्र और मिस्र के अधिकारियों ने कहा कि संघर्ष विराम के प्रयास चल रहे हैं लेकिन इसमें प्रगति के कोई संकेत नहीं है। इजराइली टेलीविजन चैनल 12 ने बुधवार देर रात बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सुरक्षा मंत्रिमंडल ने हमला तेज करने के अधिकार दिये हैं।

कब शुरू हुआ हिंसा का यह दौर
हिंसा का यह दौर एक महीने पहले यरुशलम में शुरू हुआ जहां रमजान के पवित्र महीने के दौरान हथियारों से लैस इजराइली पुलिस तैनात रही और यहूदी शरणार्थियों द्वारा दर्जनों फलस्तीनी परिवारों को निर्वासित करने के खतरे ने प्रदर्शनों को हवा दी और पुलिस के साथ झड़पें हुई। अल अक्सा मस्जिद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और प्रदर्शनकारियों पर ग्रेनेड फेंके। यरुशलम को बचाने का दावा करने वाले हमास ने रात में इजराइल पर कई रॉकेट दागे, जिसके बाद लड़ाई शुरू हो गई।

120 साल पुराना है विवाद
इजराइल और फलस्तीन के बीच टकराव की शुरुआत यहूदियों व अरब जगत के लोगों के लिए स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना के संघर्ष से हुई थी। 1947 में संयुक्त राष्ट्र के इजराइल के अस्तित्व को मान्यता देने के बाद से ही क्षेत्र में हिंसा और तनाव का दौर जारी है।

दोनों देशों के बीच में ये हैं टकराव की मुख्य वजहें
दरअसल, 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में खाड़ी क्षेत्र में कई आंदोलन हुए, जिनका मकसद यहूदियों और अरब जगत के लोगों के लिए स्वतंत्र राष्ट्र की स्थापना करना था। 1920 के दशक में फलस्तीनी राष्ट्रवाद की अवधारणा परवान चढ़ी और यरुशलम में लाखों की संख्या में अरब नागरिकों ने यहूदियों के आगमन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किए। 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फलस्तीन को दो हिस्सों में बांट दिया और यहूदियों के लिए इजराइल और अरब जगत के लोगों के लिए फलस्तीन रखा। इस पर अरब समुदाय ने आपत्ति जताई और फिर फलस्तीन में गृहयुद्ध छिड़ गया। 1967 में खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध और हिंसा के बीच गाजा पट्टी, सिनाय प्रायद्वीप, पूर्वी यरुशलम तथा पश्चिमी तट पर इजराइल का कब्जा हो गया। तब से ही दोनों देशों में सीमा विवाद जारी है।