शमीमा बेगम नाम की एक महिला को बुर्के की बजाए जींस-टीशर्ट में देखा गया जिसके इरादे बेहद खतरनाक साबित हुए हैं। यह महिा सीरिया के कैंप में जींस-टीशर्ट में दिखी थी। लंदन से भागकर सीरिया में आंतकी संगठन ISIS में शामिल होने वाली युवती शमीमा बेगम को ब्रिटेन लौटने की इजाजत मिल गई है। वह ब्रिटेन की सरकार के खिलाफ अपनी न्यायिक लड़ाई जारी रख सकती है, जिसने सुरक्षा कारणों से उसकी ब्रिटिश नागरिकता रद्द कर दी थी। अब 20 साल की हो चुकी शमीमा उन तीन लड़कियों में शामिल थी जो सीरिया में ISIS में शामिल होने के लिए साल 2015 में लंदन से फरार हो गई थीं। अपने 3 बच्चों की मौत के बाद से वह ब्रिटेन वापस लौटने की लड़ाई लड़ रही है।
ब्रिटेन के वरिष्ठ न्यायाधीशों ने इस हफ्ते आदेश दिया था कि शमीमा को ब्रिटेन में दोबारा प्रवेश करने और अपना मुकदमा लड़ने की अनुमति दी जाए। साल 2015 में आतंकी संगठन में शामिल होने के लिए पूर्वी लंदन से छिपकर सीरिया जाने वाली शमीमा उस समय 15 वर्ष की थी। इस समय वह उत्तरी सीरिया में कुर्द बलों द्वारा संचालित शिविर में रह रही है। ब्रिटेन की अपील अदालत ने कहा कि उसे निष्पक्ष सुनवाई से वंचित कर दिया गया क्योंकि वह शिविर से अपना मुकदमा नहीं लड़ सकती थी। ब्रिटेन के ITV न्यूज ने हाल ही में उसका एक फुटेज जारी किया है जिसमें वह सीरिया के शिविर में जींस-टीशर्ट और हैट में टहलती दिख रही है।
पूर्वी लंदन के एक स्कूल पढ़ने वाली तीन छात्राएं 2015 में सीरिया भाग गई थीं, शमीमा भी उन्हीं में से एक थी। वह पिछले साल सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में मिली थी और उसने घर वापस लौटने की इच्छा जताई थी। ब्रिटेन के होम सेक्रटरी साजिद जाविद ने शमीमा की नागरिकता निरस्त कर दी थी, लेकिन शमीमा ने इस फैसले को विशेष आव्रजन अपील आयोग में चुनौती दी थी। शमीमा की दलील थी कि वह किसी और देश की नागरिक नहीं है और जाविद के फैसले से वह राज्यविहीन हो गई है।
सीरिया में एक शरणार्थी शिविर में मिली शमीमा बेगम ने इससे पहले वहां एक आईएस लड़ाके से शादी की। गर्भवती होने के बाद उसने 2 बच्चों को जन्म दिया था और दोनों की मौत हो गई। जब वह तीसरे बच्चे को जन्म देने वाली थी, इसी दौरान उसने ब्रिटेन स्थित अपने घर लौटने की इच्छा जताई जबकि शमीमा के सीरिया के शरणार्थी शिविर में होने की जानकारी के बाद प्रशासन ने फरवरी में उसकी नागरिकता रद्द कर दी। उसके तीसरे बच्चे का जन्म 16 फरवरी को हुआ और 8 मार्च को न्यूमोनिया के चलते बच्चे की मृत्यु हो गई। तब से शमीमा ब्रिटिश नागरिकता को रद्द करने के फैसले के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रही है।