69000 शिक्षक भर्ती में धांधली का खुलासा करने वाले SSP पर सरकार की गाज गिर गई है जिसके बाद उन्हें वेटिंग लिस्ट में भेजा गया है। यह भर्ती उत्तर प्रदेश में निकाली गई थी जिसके तहत 69000 शिक्षक भर्ती किए जाने थे। लेकिन इस मामले में ऐक्शन करने वाले प्रयागराज के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को प्रतीक्षारत सूची में डालने के फैसले पर प्रतियोगी छात्रों ने सवाल खड़े किए हैं। एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को सोमवार रात प्रतीक्षारत सूची में भेजते हुए आईपीएस अभिषेक दीक्षित को प्रयागराज का नया एसएसपी बनाया गया है। प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि शिक्षक भर्ती के मामले में तमाम एफआईआर कराने और नकल माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने पर एसएसपी के सजा के तौर पर वेटिंग लिस्ट पर भेजा गया है।
दरअसल, सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज ने ही बतौर एसएसपी प्रयागराज के सोरांव थाने में एक प्रतियोगी छात्र के अनुरोध पर एफआईआर कराई थी। 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के मामले में एफआईआर कराते हुए एसएसपी ने खुद जांच की मॉनिटरिंग की थी। इस जांच में दो ऐसे आईपीएस अफसरों को लगाया था, जिनकी पहचान पश्चिमी यूपी में नकल माफिया के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए रही है। अशोक वेंकटेश और अनिल यादव नाम के इन दो अफसरों के साथ एसएसपी ने खुद ऐक्शन शुरू किया।
इस कार्रवाई के असर से ही तमाम आरोपियों की गिरफ्तारी होने लगी और शिक्षक भर्ती में सॉल्वर से लेकर नकल माफिया तक के शामिल होने की बात सामने आने लगी। शुरुआती दौर पर प्रयागराज एसएसपी के निर्देश पर ही कार से जा रहे 6 संदिग्धों को साढ़े सात लाख रुपये के साथ हिरासत में लिया। इसके अलावा तमाम स्कूलों के खिलाफ भी कार्रवाई करते हुए नकल माफिया कृष्ण लाल पटेल समेत तमाम आरोपी गिरफ्तार किए गए।
प्रतियोगी छात्रों का आरोप है कि नकल माफिया और शिक्षक भर्ती की अनियमितता को उजागर करने के कारण ही सरकारी तंत्र ने एसएसपी पर कड़ी कार्रवाई की है। प्रयागराज के तमाम प्रतियोगी छात्र एसएसपी के ट्रांसफर को लेकर सोशल मीडिया पर अपना विरोध भी जता रहे हैं।