रूस ने परमाणु अलर्ट कर दिया है, इस ऐलान के बाद रूसी सैनिकों ने भी युद्ध तेज कर दिया है। रूसी सेना की गोलाबारी से यूक्रेन के जपोजिरिया परमाणु प्लांट में आग लग गई है, जिससे माना जा रहा है अगर आग ज्यादा फैल जाती है तो इस पर काबू पाना मुश्किल हो जाए और 10 गुना विस्फोट होगा जो कि यूक्रेन को तबाह कर देगा। इसी बीच राष्‍ट्रपति Vladimir Putin ने सेना को परमाणु अलर्ट पर रखा है. इस बात से यूक्रेन समेत यूरोपीय देश भी चिंता में हैं।


साथ ही यूरोप में आयोडीन की कमी हो गई है। बिजनेस रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी सेना को परमाणु अलर्ट पर रखने के बाद ही यूरोपीय देश बुल्‍गारिया, चेक रिपब्‍ल‍िक और पोलैंड की फार्मेसी में आयोडीन का पूरा स्‍टॉक ही खत्‍म हो गया है। लोगों का मानना है कि Iodine परमाणु हमले के असर से बचा सकता है।यह भी पढ़ें- यूक्रेन के चेर्निहाइव का सैटेलाइट से दिखा ऐसा खौफनाक मंजर, हर तरफ आग के गोल और धुंआ धुंआबुल्गारिया में फार्मेसी यूनियन के हेड निकोलाय कोस्तोव का कहना है कि पिछले 6 दिनों में जितनी आयोडीन बेची गई है उतनी कभी सालभर में भी नहीं बिकी है। इन देशों में पर्याप्‍त आयोडीन की सप्‍लाई करने के लिए ऑर्डर दे दिए गए हैं, लेकिन उम्‍मीद है कि जिस तरह से आयोडीन की डिमांड है उससे लगता है कि अभी भी आयोडीन की कमी हो सकती है।
किस हद तक यूरोपीय देश अलर्ट हैं यह इस बात से समझा जा सकता है कि जिन्‍हें रूसी सेना के हमले से खतरा नहीं है, वहां भी नमक की डिमांड बनी हुई है. इनमें बेल्जियम, फ्रांस और नीदरलैंड्स भी शामिल है। हाल में रूसी सेना ने यूक्रेन के जिस चर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्‍जा किया है, वहां 1986 में परमाणु विस्‍फोट हुआ था, इससे यूक्रेन के लोगों पर बुरा असर पड़ा। उस समय भी लोगों को बचाने के लिए आयोडीन के डोज दिए गए थे।ऐसी स्थिति में अमेरिकी स्‍वास्‍थ्‍य एजेंसी CDC का कहना है, आयोडीन की दवाएं या सीरप को रेडिएशन के कारण कैंसर के खतरे से बचाने के लिए इस्‍तेमाल किया जा सकता है लेकिन ध्‍यान रखने वाली बात है कि अगर शरीर में रेडिएशन का असर नहीं हुआ है और कोई इंसान आयोडीन सीरप लेता है तो यह सुरक्षा करने की जगह नुकसान पहुंचा सकता है।