त्रिपुरा में पिछले दो दिन से सर्विस प्रोवाइडर्स ने राज्य सरकार के निर्देश पर पूरे टेलिकम्यूनिकेशन नेटवर्क को बाधित कर रखा है। इससे आम जनजीवन बाधित हो गया है। सूचना मंत्री भानु लाल साहा ने कहा, 19 सितंबर को ईस्टर्न अगरतला के मंडवाई में युवा टीवी पत्रकार की हत्या के बाद बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई थी। प्रशासन ने टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को सोशल मीडिया के जरिए जातीय तनाव व अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए कहा था। इस तरह के हाई वोल्टेज टेंशन में इंटरनेट सेवा का भी समान रूप से बुरा प्रभाव पड़ता है। के गृह सचिव राकेश शरवाल ने 19 सितंबर की रात सभी टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को अगले आदेश तक डाटा व एसएमएस सर्विस को ब्लॉक करने को कहा था।
लेकिन अभी भी इंटरनेट व एसएमएस सेवा बाधित होने के कारण बड़े स्तर पर मीडिया फंक्शनिंग प्रभावित हुई है। साथ ही बैंकिंग, ऑनलाइन बिलिंग व हॉस्पिटल सर्विसेज जैसी पब्लिक यूटिलिटी की सेवाएं भी प्रभावित हुई है। पूरे राज्य में दो दिन के लिए टेलिकॉम नेटवर्क बाधित करने के फैसले का पूरे विपक्ष ने विरोध किया है। विपक्ष का आरोप है कि यह फिर साबित हो गया है कि लेफ्ट फ्रंट की सरकार कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं है और ग्लोबल ऑडियंस के समक्ष त्रिपुरा में कश्मीर जैसी स्थिति प्रदर्शित करने की कोशिश कर रही है। पूजा शॉपिंग के अलावा दुर्गा पूजा के पहले एयर व रेलवे टिकट बुकिंग को लेकर यात्री परेशान हैं।
राज्य भाजपा के अध्यक्ष बिप्लब कुमार देब ने कहा, कुछ वक्त के लिए राज्य सरकार सोशल मीडिया साइटों व नेटवर्क को ब्लॉक कर सकती है लेकिन उसे इंटरनेट सेवा रोकने का कोई अधिकार नहीं है जब ज्यादातर पब्लिक यूटिलिटी सर्विसेज व मीडिया फंक्शनिंग पूरी तरह से इंटरनेट पर नर्भर है। यह कुछ और नहीं बल्कि सूचना के फ्री फ्लो को रोकने की नाकाम कोशिश है। मुख्यमंत्री माणिक सरकार के चेहरे को शर्मिंदगी से बचाने के लिए ऐसा जानबूझकर किया गया है। देब ने कहा, राज्य सरकार को पब्लिक यूटिलिटी सर्विस रोकने का कोई अधिकार नहीं है। वह भी उस वक्त जब नरेन्द्र मोदी सरकार डिजिटल एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ बडऱही है और ज्यादातर फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन इंटरेस्ट बेस्ड हो गए हैं। इंटरनेट सर्विस बाधित होने से पब्लिक लाईफ बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।