जर्मनी में 22 से 25 सितंबर तक इंटरनेशनल डेंटल शो का आयोजन किया गया। इसमें जयपुर की डॉ. रिम्मी शेखावत को आमंत्रित किया गया। डेंटल के क्षेत्र की सबसे बड़ी कॉन्फ्रेंस में कार्टिको बेसल इंप्लांट या मोनो इंप्लांट की नई तकनीक का खुलासा किया गया। राजस्थान में यह तकनीक एक-दो स्थानों पर ही उपलब्ध है।

जयपुर की डॉक्टर रिम्मी शेखावत 20 सितंबर को जयपुर से जर्मनी के लिए रवाना हुई थीं। शनिवार को कॉन्फ्रेंस का अंतिम दिन है। कॉन्फ्रेंस में रिम्मी ने बताया कि बेसल इंप्लांट में सामान्य इंप्लाइंट के मुकाबले बहुत कम समय लगता है। 

यानी सिर्फ दो से तीन दिन में ही दांत के इंप्लांट की प्रक्रिया पूरी होकर खाने-पीने योग्य स्थिति में आ जाता है। जबकि सामान्य इंप्लांट में दो से ढाई माह लग सकते हैं। ऐसे में बेसल इंप्लांट की प्रक्रिया आजकल दुनिया के प्रमुख देशों में लोकप्रिय हो रही है। इस इंप्लांट की रिसर्च के बाद आई लेटेस्ट टैक्नोलॉजी पर विभिन्न देशों के एक्सपर्ट्स ने यहां कॉन्फ्रेंस में दुनियाभर के आए डॉक्टर्स को जानकारी दी।

कॉन्फ्रेंस में जयपुर की डॉक्टर रिम्मी के अलावा बेंगलुरू के डॉ. वीरेंद्र कुमार और जोधपुर के डॉ. सचिन लोढ़ा भी शामिल हुए। शनिवार देर रात कॉन्फ्रेंस के समापन के बाद सभी प्रतिनिधि अपने-अपने देशों को लौट सकेंगे।