भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्ते एकबार फिर से पटरी आने वाले हैं। कश्मीर में जारी तनाव के बीच भारत और पाकिस्तान के शीर्ष इंटेलिजेंस अधिकारियों ने इस साल जनवरी में दुबई में गुप्त बैठक की है। इस बैठक के पीछे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की अहम भूमिका है।

2019 में कश्मीर में अर्धसैनिक बल के एक काफिले पर आत्मघाती हमले के बाद से दोनों देशों के बीच टेंशन कायम है। 2019 के पुलवामा हमले के बाद भारत ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। भारत ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया था। इसके साथ ही दोनों मुल्कों की सरहद पर भी तनाव बढ़ गए और इसका नतीजा यह हुआ कि इनके बीच राजनयिक संबंध ठप हो गए और द्विपक्षीय व्यापार पर भी रोक लगा दी गई।

बहरहाल, दोनों देशों के गोपनीय सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने बताया कि अब भारत-पाकिस्तान में तनाव कम करने की कवायद शुरू हो गई है और दोनों मुल्कों के अधिकारियों की दुबई में जनवरी में बैठक हुई थी। बताया जा रहा है कि दोनों सरकारों ने संबंधों को सामान्य करने के लिए कूटनीतिक कदम उठाने शुरू किए हैं। इसके तहत पिछले दरवाजे से दोनों देशों में पिछल कई महीने से बातचीत की कवायद चल है।

भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर बड़ा मुद्दा बना हुआ है। फिलहाल, भारत की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के अफसरों ने दुबई का दौरा किया। बताया जा रहा है कि संयुक्त अरब अमीरात(UAE) दोनों मुल्कों के बीच अमन शांति बहाल करने की कवायद में जुटा हुआ है। सूत्रों के अनुसार दुबई में इस बैठक का आयोजन UAE सरकार ने किया था।

UAE ने कश्मीर मुद्दे पर तनाव को कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के मकसद से भारत और पाकिस्तान को एक साथ लाने में भूमिका निभाई है। यह बात यूएई के दूत ने भी स्वीकार की है। राजदूत यूसेफ अल ओतैबा ने ये बात कही है। यह पहली दफा है जब यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से भारत-पाकिस्तान के बीच संबंधों को सामान्य करने के प्रयासों में अपने देश की भूमिका को स्वीकार किया है। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के हूवर इंस्टीट्यूशन की ओर से आयोजित वर्चुअस समिट में अल ओतैबा और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एचआर मैकमास्टर के बीच एक चर्चा के दौरान सामने आई। अल ओतैबा ने खुद इस मुद्दे को उठाया और इस सवाल पर जवाब दिया कि क्या यूएई पाकिस्तान को अफगानिस्तान में समझौता करने में अधिक सार्थक भूमिका निभाने के लिए राजी कर सकता है।

बहरहाल, इस संबंध में सवाल किए जाने पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कोई जवाब नहीं दिया। पाकिस्तान की सेना, जो आईएसआई को नियंत्रित करती है, ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

मगर एक शीर्ष पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक आयशा सिद्दीका ने कहा कि उनका मानना है कि भारतीय और पाकिस्तान खुफिया अधिकारियों की तीसरे देशों में कई महीनों से बैठक चल रही है। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि थाईलैंड, दुबई और लंदन में उच्चतम स्तर के लोगों के बीच बैठकें हुई हैं।" 

ऐसी बैठकें अतीत में भी हुई हैं, खासकर संकटों के समय में, लेकिन कभी भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया। दिल्ली में बैठ एक सूत्र ने बताया, “बहुत कुछ है जो अभी भी गलत हो सकता है, इसकी आशंका हमेशा रहती है। यह भयावह है," सूत्र ने कहा कि "यही कारण है कि कोई भी सार्वजनिक रूप से इसे लेकर बात नहीं कर रहा है, हमारे पास इसके लिए एक नाम भी नहीं है, यह एक शांति प्रक्रिया नहीं है। आप इसे फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश बोल सकते हैं।” 

दोनों देशों के बीच तालमेल बैठाने की कोशिश की जा रही है। चीन से गतिरोध शुरू होने के साथ भी भारत ने पाकिस्तान सीमा को सील कर दिया। भारत नहीं चाहता है कि उसे दूसरे मोर्चे पर सैन्य बलों की तैनाती करनी पड़े।

चीन के आसरे चलने वाले खस्ताहाल पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से राहत पैकेज की गुहार लगाई है। विश्लेषकों का कहना है कि कश्मीर में तनाव बढ़ने से पाकिस्तान को कई मोर्चों पर जूझना पड़ेगा। अमेरिका अफगानिस्तान से अपनी सेना हटाने की तैयारी में है। जैसे ही अमेरिका ने अपने प्लान को अमलीजामा पहनाया, अफगान सीमा पर भी पाकिस्तान को चौंकना रहना पड़ेगा। पाकिस्तान की चुनौती दो-तरफा बढ़ जाएगी।

भारत-पाकिस्तान और कश्मीर को लेकर होने वाले संघर्ष पर किताब लिखने वाले रॉयटर्स के एक पूर्व पत्रकार का कहना है, 'भारत-पाकिस्तान के लिए खामोश रहने से बेहतर है कि दोनों मुल्क आपस में बात करें, और इससे बेहतर यह भी होगा कि यह बातचीत बिना किसी शोरशराबे के हो।'