मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश के लिए विदेश मंत्रालय के लिए आरक्षित सीट रिक्त रहने के बाद इसे पूर्वी भारत के छात्रों के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा रिजर्व रखने को कहा गया था। लेकिन मेघालय व लक्षद्वीप की दो छात्राओं को 31 अगस्त की शाम 4 बजे राज्य सरकार द्वारा नोटिस जारी किया गया और एक घंटे के अंदर अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए रिपोर्टिंग करने को कहा गया।

पांच दिन के बावजूद दोनों छात्राओं में से किसी को भी कॉलेज प्रबंधन द्वारा कोई लिखित में जवाब नहीं दिया गया। अब दोनों छात्राएं शनिवार को दिल्ली पहुंचकर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार तक याचिका दायर करने का दावा कर रहीं हैं।


मेघालय के शिलांग की छात्रा इबूलंग ख्रिस्ती व लक्षद्वीप की थायबाथुल मुनवरा ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अपर सचिव ने राज्य सरकार को 31 अगस्त को पत्र लिखकर अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में चयनित छात्रा को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए। 31 अगस्त की सुबह 10 बजे राज्य सरकार को सूचना मिली।


राज्य सरकार ने चयनित छात्रों की सूची निकालने के बाद उन्हें सूचना दी। सरकार को पूरी प्रक्रिया पूर्ण करने में शाम 4 बज गए, फिर इसकी जानकारी उन्हें गई। 4 बजे नोटिस देने के बाद शाम 5 बजे तक अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में किसी तरह प्रवेश लेने को कहा गया। जबकि लक्षद्वीप से केरल पहुंचने में ही 6 से 7 घंटा लगता है। नोटिस मिलने के बाद दोनों ही छात्राओं को अंबिकापुर पहुंचने में दो दिन का समय लग गया।


इबूलंग ख्रिस्ती ने बताया कि किसी प्रकार का रिस्पांस नहीं मिलने पर शुक्रवार को रायपुर रवाना होने के बाद वहां से दिल्ली रवाना हो जाएंगीं। यहां वकील से मिलने के बाद सोमवार को इस संबंध में याचिका भी दायर करेंगी। उन्होंने बताया कि डीएमई रायपुर व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अब तक कोई भी लिखित जानकारी प्रवेश के संबंध में नहीं दी गई है।