लोहे को लोहा काटता है और जहर को जहर, इस कहावत में मच्छर का नाम भी शामिल हो सकता है। दरअसल, डेंगू (dengue) फैलाने वाले मच्छरों को समाप्त करने का तरीका वैज्ञानिकों ने ढूंढ़ लिया है। शोधकर्ताओं ने लैब में एक ऐसा ‘अच्छा मच्छर’ (good mosquitoes) विकसित किया है, जिससे डेंगू फैलाने वाले मच्छरों का अंत हो जाएगा। इसके काटने से लोगों को डेंगू नहीं होगा। ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी और इंडोनेशिया की गादजाह मादा यूनिवर्सिटी (indonesian researchers) ने संयुक्त रूप से यह शोध किया।

जानकारी के मुताबिक इस मच्छर (good mosquitoes) को लैब में तैयार करने के लिए कीट की एक प्रजाति की मदद ली गई, जिसमें डेंगू वायरस रोधी बैक्टीरिया (anti dengue virus bacteria) पाया जाता है। इस बैक्टीरिया का नाम वोलबाचिया है। लैब में प्रजनन कराकर जिन ‘अच्छे मच्छरों’ का तैयार किया गया है उनमें ये बैक्टीरिया पहले से मौजूद रहते हैं। वल्र्ड मॉसकिटो प्रोग्राम (डब्ल्यूएमपी) (world mosquito program) की सदस्य पुरवंती ने कहा कि यह मच्छर इस मायने में ‘अच्छा मच्छर’ है कि यह डेंगू वायरस को फैलने नहीं देगा। डेंगू के वाहक एडीज एजिप्टी मच्छर जब इन ‘अच्छे मच्छर’ से मिलकर प्रजनन करेंगे तो उनसे उत्पन्न नए मच्छर भी वोलबाचिया बैक्टीरिया (wolbachia bacteria) से लैस होंगे यानी ‘अच्छे मच्छर’ होंगे। इन मच्छर के काटने से डेंगू नहीं फैलेगा। इस तरह डेंगू बीमारी फैलाने वाले मच्छरों का अंत होगा।

इंडोनेशिया के योग्याकार्ता शहर में डेंगू के कारण रेड जोन घोषित क्षेत्र में जब लैब में विकसित वोलबाचिया बैक्टीरिया (wolbachia bacteria) से लैस मच्छरों को छोड़ा गया तो डेंगू के मरीज करीब 77 फीसदी तक कम हो गए। इसके अलावा डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती होने वालों की संख्या में 86 फीसदी तक कम हो गई। इस ट्रायल के परिणाम से संबंधित शोध रिपोर्ट को न्यू इंग्लैंड जर्नल में प्रकाशित किया जा चुका है।