प्रधानमंत्री मोदी के आवास और काफिले की सुरक्षा में ऐंटी-ड्रोन सिस्टम लगेंगे जिनका निर्माण भारत में ही हो रहा है। पीएम मोदी की सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे निपटने के लिए उनकी सुरक्षा और लगातार चुस्त-दुरुस्त किया जा रहा है। इसी क्रम में अब प्रधानमंत्री आवास के अलावा कारों के काफिलों को भी ऐंटी-ड्रोन सिस्टम से सुसज्जित किया जाना है। उधर, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने सुरक्षा बलों के लिए तैयार किए जाने वाले ऐंटी-ड्रोन सिस्टम का उत्पादन करने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स से डील कर रखी है।
खबर है कि प्रधानमंत्री के सुरक्षा दस्ते में ड्रोन को मार गिराने वाले ऐसे सिस्टम को शामिल किया जाएगा जिसे यात्रा के दौरान भी पीएम की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अखबार के मुताबिक, पीएम की सुरक्षा में ऐंटी-ड्रोन सिस्टम रखना अनिवार्य कर दिया गया है क्योंकि इस साल की शुरुआत से ही उन पर ड्रोन अटैक का खतरा बढ़ गया है। दरअसल, पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने हमलों के साथ-साथ मादक पदार्थों की खेप भारत की सीमा में भेजने के लिए चीन निर्मित कमर्शियल ड्रोन का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। ऐसे में डीआरडीओ दो तरह के ऐंटी-ड्रोन बनाने में जुट गया है। इसका मकसद ड्रोन को निष्क्रिय करना है या फिर उसे मार गिराना।
यह भी खबर है कि डीआरडीओ चीफ सतीश रेड्डी जल्द ही सशस्त्र बलों को देसी ऐंटी-ड्रोन सिस्टम की जानकारी चिट्ठी के जरिए देंगे। इस साल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस समारोह के आयोजन स्थलों पर ऐंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए गए थे। ये ऐंटी-ड्रोन सिस्टम रेडार कपैबिलिटी से युक्त हैं जो दो से तीन किलोमीटर दूर से ही दुश्मन ड्रोन को निष्क्रिय कर सकते हैं। दूसरे तरह के ऐंटी-ड्रोन सिस्टम की क्षमता है कि वो दो-तीन किलोमीटर की दूरी से ही ड्रोन को लेजर बीम के जरिए मार गिराए।

पिछले वर्ष 2019 से ही पाकिस्तानी आतंकी संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार भारतीय सीमा में लगातार ड्रोन भेजकर हथियार और मादक पदार्थ भेजे ताकि उग्रवाद को दोबारा हवा दी जा सके। इसी तरह का मोडस ऑपरैंडी जम्मू-कश्मीर में नियंत्रम रेखा (LoC) पर देखा जा रहा है। मालूम हो कि चीन निर्मित कमर्शियल ड्रोन 10 किलो तक हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थ वहन कर सकते हैं।

अच्छी बात यह है कि एक तरफ डीआरडीओ ऐंटी-ड्रोन सिस्टम डिवेलप करने में जुटा है तो दूसरी तरफ देश की प्राइवेट कंपनियां भी सिक्यॉरिटी एजेंसियों के साथ मिलकर इस काम में जुटी हैं। देश में निर्मित ऐंटी-ड्रोन सिस्टम को एलओसी पर तैनात भी किया जा चुका है और ये सिस्टम हवाई खतरों से निपटने में सफल भी रहे हैं।