रेल मंत्रालय ने लंबी दूरी की ट्रेनों को यात्रियों के लिए और आरामदेह बना दिया है। इसके लिए मंत्रालय ने बोगियां की नई डिजाइन तैयार की है जो देश की आधुनिक ट्रेन तेजस के आधार पर है। इससे लोगों को रेल यात्रा का नया अनुभव मिलेगा। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने खुद नई बोगियाों की तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर की है।
नई तकनीक और डिजाइन की ये बोगियां इस वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारतीय रेलवे के प्रोडक्शन यूनिट इंट्रीगल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) चेन्नई और मॉर्डन कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) रायबरेली में तैयार होंगी।

नई तकनीक पर आधारित 500 नए कोच बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इन कोचों को बनाए जाने के बाद इन्हें प्रीमियम और महत्वपूर्ण ट्रेनों में जोड़ा जाएगा और बाद में धीरे-धीरे पूरे रेल नेटवर्क में पुराने डिब्बों से बदल दिया जाएगा।
इन नए कोचों में सबसे बड़ी खासियत ये है कि इनके सभी गेट ऑटेमेटिक होगें जो ट्रेन के स्टेशन छोड़ते ही बंद हो जाएंगे। इसका रिपोट ट्रेन के गार्ड के पास होगा। इससे गेट खुले रहने की वजह से होने वाले वाले हादसों में कमी आएगी और लूटपाट की आशंका भी खत्म होगी। इसके साथ ही जब तक सभी गेट बंद नहीं होंगे ट्रेन नहीं चलेगी।

इसके अलावा स्लीपर कोच में भी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है जिससे आप अपनी सीट पर बैठे-बैठे पता लगा लेंगे कि शौचालय खाली है या फिर उसका कोई इस्तेमाल कर रहा है। इसके साथ ही वॉशरूम में पानी की उपलब्धता है या नहीं सेंसर से पहले ही इसकी भी जानकारी मिल जाएगी। टॉयलेट के अंदर टच लेंस फीटिंग और एंटी ग्रैफिटी कोटिंग की व्यवस्था होगी ताकि अंदर कोई भी यात्री कुछ लिख ना सके और ट्रेन को गंदा ना कर सके। टॉयलेट गेट पर खाली और इस्तेमाल होने की सूचना देने के लिए लाइट्स का इस्तेमाल किया जाएगा।
ट्रेन में सबसे ज्यादा शिकायतें टॉयलेट की गंदगी और साफ-सफाई की कमी को लेकर मिलती है। यही वजह है कि नए रेल डिब्बों में इसकी भी व्यवस्था की गई है। नए रेल डब्बों में हवाई जहाज की तर्ज पर बायो वैक्यूम टॉयलेट सिस्टम लगाया है। इससे बेहतर तरीके से फ्लशिंग होगी साथ ही पानी का भी कम से कम इस्तेमाल होगा।

लोगों की यात्रा को आरामदेह बनाने के लिए इस बार कोच में पीयू फोम से बने सीट और बर्थ लगाए गए हैं जो काफी सुविधाजनक माना जाता है। स्लीपर में भी अब खिड़कियों पर रोलर ब्लाइंड पर्दों का इस्तेमाल होगा। इसके साथ ही अब हर बर्थ पर एलईडी रीडिंग लाइट और चार्जिंग प्वाइंट बनाए गए हैं ताकि किसी एक प्वाइंट पर लोगों की लंबी भीड़ ना लगे।