भारतीय रेलवे ने नया कारनामा कर दिखाया जिसके चलते अब ट्रेनें बिना बिजली और डीजल के चलेंगी। रेलवे ने बैटरी से चलने वाला इंजन पशुमाई 2.0 तैयार करके पटरियों पर उतार दिया है। डुअल मोड का यह इंजन बैटरी और बिजली, दोनों से चल सकेगा। प्रदूषण को कम करने और ग्रीन रेलवे की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
कुछ समय पहले दक्षिण रेलवे ने एक रेल इंजन को बैटरी से चलने वाले इंजन में बदलने पर काम शुरू किया थाण् इस काम के लिए अराकोणम लोको शेड से एक इंजन को चुन कर उसे इलेक्ट्रिक इंजन में बदला गया।

इस पूरे प्रोजेक्ट में बहुत कम खर्चा आया है और इस इंजन ने अपने तमाम ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे भी कर लिए हैं। यह इंजन बैटरी पर तकरीबन 4 घंटे चलता है। इंजन की बैटरी को चार्ज करने के लिए दो फास्ट चार्जर भी लगाए गए हैं। बैटरी मोड में यह इंजन ट्रेन के साथ 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।
दक्षिण रेलवे का कहना है कि यह इंजन देश के रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को ईको-फ्रेंडली बनाने में एक अहम रोल अदा करेगा। बैटरी इंजन बिजली की खपत को कम करके रेलवे के खर्च को बचाने और पर्यावरण में कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद करेगा। यह इंजन उन हालात में भी कारगर रहेगा जब किसी वजह से रेलवे की बिजली सप्लाई ठप करनी पड़ी हो।
रेलवे की इस कामयाबी पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी बधाई दी है। पीयूष गोयल ने ट्वीट में लिखा है कि बैटरी से ऑपरेट होने वाला यह लोको एक उज्ज्वल भविष्य का संकेत है जो डीजल के साथ विदेशी मुद्रा की बचत और पर्यावरण संरक्षण में एक बड़ा कदम होगा।
ऐसा नहीं है कि ग्रीन इंजन पहली बार बनाया गया हो। इससे पहले जबलपुर रेलवे मंडल ने भी बैटरी से चलने वाले इंजन को बनाया था। पश्चिम मध्य रेल के जबलपुर मंडल में बैटरी से चलने वाले ड्यूल मोड शंटिंग लोको नवदूत को बनाया है।