फादर्स डे हर साल जून में तीसरे रविवार को मनाया जाता है। इस बार यह स्पेशल डे 16 जून को आया है। इस मौके पर हम आज ऐसे पिताओं की बात करेंगे जिन्होंने अपने बच्चों को सिर्फ अपनी संस्कृति से ही रूबरू नहीं कराया बल्कि अपनी राजनीति भी विरासत में दी है। जाहिर सी बात है राजनीतिक पृष्ठभूमि उनके पिता की अच्छी रही होगी। जिसके चलते आज वो राजनीति के मैदान में दमदार पारी खेल रहे हैं। आइए जानते हैं देश के पूर्वोत्तर राज्यों के उन नेताओं के बारे में जिन्हें उनके पिता ने राजनीति विरासत एक तोहफे के तौर पर दी और जिसके बलबूते आज वो राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अच्छी धाक जमा चुके हैं।
इस लिस्ट में सबसे ऊपर नाम आता है हमारे युवा एवं खेल मंत्री किरण रिजिजू का...


किरण रिजिजू ...

अरुणाचल प्रदेश की प्रथम विधानसभा के अस्थायी अध्यक्ष के रूप में कार्य कर चुके रिन्चिन खारू के बेटे किरण रिजिजू आज मोदी मंत्रिमंडल में युवा एवं खेल राज्यमंत्री बन चुके हैं लेकिन ऐसा नहीं है किरण रिजिजू ने ये मुकाम खुद हासिल कर लिया हो, बेशक इसमें उनके पिता ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। किरण रिजिजू एक राजनीतिक परिवार से आते हैं इसलिए उन्होंने भी छात्र जीवन में ही राजनीति में कदम रख दिया। वह हमेशा से राष्ट्रीय एकीकरण के पक्षधर रहे हैं लेकिन नॉर्थ ईस्ट की विशेष परंपराओं और संस्कृति को संजोए रखने के लिए भी आवाज उठाते रहे हैं। तेज तर्रार इमेज के कारण ही उन्हें 31 साल की अवस्था में ही खादी ग्रामोद्योग का सदस्य बना दिया गया था।


कोनराड संगमा...
मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री पी॰ ए॰ संगमा के पुत्र कोनराड, जेम्स और बेटी अगाथा संगमा आज सत्ता में काबिज हैं। कोनराड संगमा जहां राज्य के मुख्यमंत्री हैं वहीं बहन अगाथा संगमा पूर्व में पंद्रहवीं लोकसभा में सांसद तथा केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री भी थीं, जबकि उनके भाई जेम्स संगमा मेघालय विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक हैं। साल 2016 में पीए संगमा के निधन होने की वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुए। इस बार पीए संगमा के बेटे कोनराड संगमा ने जीत दर्ज की। हालांकि 2018 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बन गए।


अगाथा संगमा...
भारत सरकार की 15वीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रह चुकी अगाथा संगमा की राजनीतिक पृष्ठभूमि बड़ी ही मजबूत रही है क्योंकि वो पीए संगमा की बेटी और राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की बहन हैं। अगाथा संगमा पूर्व में पंद्रहवीं लोकसभा में सांसद तथा केन्द्र सरकार में राज्य मंत्री थीं। अगर 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो अगाथा संगमा ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी और तीसरी बार हुए लोकसभा चुनाव में भी अगाथा ने जीत दर्ज की ।


गौरव गोगोई...

तरुण गोगोई के बेटे गौरव गोगोई मोदी लहर के बावजूद कांग्रेस के टिकट से जीतकर लोकसभा के सांसद चुने गए हैं। 2014 के चुनावों में वे असम की कलियाबोर सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर निर्वाचित हुए। इस बार 2019 लोकसभा चुनाव में भी गौरव गोगई ने कांग्रेस की लाज बचाते हुए कलियाबोर से शानदार जीत दर्ज की है। इस बात को नहीं नकारा जा सकता कि गौरव को अपने पिता की वजह से इतनी बड़ी पहचान मिली है लेकिन इस बात में भी कोई शक नहीं कि जनता के विश्वास और अपने काम के प्रति निष्ठा के चलते मोदी लहर और विषम परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जीत हासिल की। गौरव खुद प्रतिभावान हैं। उन्हें 2018 में फेम इंडिया और एशिया पोस्ट के सर्वे में चुने गए 25 बेस्ट सांसदों में शामिल किया गया था।


सुष्मिता देब...
साल 2014 में संतोष मोहन देव ने अपनी सियासी विरासत बेटी सुष्मिता देव को सौंप दी। पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और वे उम्मीदों पर खरी उतरती हुई संसद पहुंचीं। आज सुष्मिता देब कांग्रेस में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुईं हैं। देब वर्तमान में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्यक्षा भी हैं।