रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार को केरल के कोच्चि में थे।  यहां पर उन्‍होंने कोचिन शिपयार्ड में बन रहे भारत के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर (IAC) आईएनएस विक्रांत के निर्माण की जानकारी भी ली।  

आईएनएस विक्रांत को IAC-1 विक्रांत के तौर पर भी जाना जाएगा।  रक्षा मंत्री ने इसे देश का गौरव और आत्‍मनिर्भर भारत का एक चमकता हुआ उदाहरण करार दिया है।  भारत के पास अभी एक ही एयरक्राफ्ट कैरियर है और इसे आईएनएस विक्रमादित्‍य के तौर पर जानते हैं। आइए आपको देश के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर के बारे में बताते हैं। 

आईएनएस विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर है।  इसका सी ट्रायल साल 2021 में शुरू हो जाएगा। साल 2022 तक इसे नौसेना में कमीशंड कर दिया जाएगा. इंडियन नेवी में इस समय 48 जहाजों और पनडुब्बियों को कमीशन करने पर काम जारी है। 

आईएनएस विक्रांत पर फरवरी 2009 में काम शुरू हुआ था मगर इसे कई बार रोका गया. इस वजह से प्रोजेक्‍ट में देर होती गई। इस एयरक्राफ्ट कैरियर में 75 फीसदी स्वदेशी उपकरण लगे हैं।  साथ ही इसे तैयार करने में कई भारतीय कंपनियों की मदद ली गई है। कंपनियों ने अलग-अलग तरीके से इसे तैयार करने में मदद की है। 

विक्रांत, संस्‍कृत के शब्‍द विक्रांतः से प्रेरित है. हिंदी में इसका अर्थ ‘साहसी’ होता है। आईएनएस विक्रांत फिलहाल एक एडवांस स्‍टेज में है और दिसंबर 2021 में इसे समंदर में उतार दिया जाएगा। आईएनएस विक्रांत एक मॉर्डन एयरक्राफ्ट कैरियर है जिसका वजन करीब 40,000 मीट्रिक टन है।

इस जहाज की लंबाई करीब 260 मीटर और इसकी अधिकतम चौड़ाई 60 मीटर है। साल 2022 के अंत तक इसके नेवी में शामिल होने की उम्‍मीदे हैं। एयरक्राफ्ट कैरियर से जेट्स को टेकऑफ करने में मुश्किलें न हों इसके लिए इसमें 37,500 टन का रैम्‍प लगाया गया है।

तैनात होंगी 64 बराक मिसाइलें

आईएनएस विक्रांत से मिग-29के और बाकी हल्के फाइटर जेट्स टेक ऑफ कर सकेंगे। आईएनएस विक्रांत करीब 30 जेट्स की स्‍क्‍वाड्रन को संभाल सकता है।  इसमें करीब 25 ‘फिक्स्ड-विंग’ हेलीकॉप्‍टर को भी जगह मिलेगी।  इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर मिग-29के, के अलावा 10 कामोव का 31 या वेस्टलैंड सी किंग हेलीकॉप्‍टर तैनात हो सकते हैं। इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर स्ट्राइक फोर्स की रेंज 1500 किलोमीटर है। इसपर 64 बराक मिसाइलें लगी होंगी। जो जमीन से हवा में मार करने में सक्षम हैं।