मुंबई में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में निर्मित भारतीय नौसेना के युद्धपोत और स्कॉर्पीन डिजाइन की एक पनडुब्बी को नवंबर के अंत तक कमीशन प्राप्त हो जाएगा, जिससे नौसेना की मारक क्षमता और अधिक बढ़ जाएगी। प्रोजेक्ट 15बी के पहले जहाज ‘विशाखापत्तनम’ (Warship Visakhapatnam) को 21 नवंबर को और सबमरीन वेला (Submarine Vela), जो कलवरी क्लास की चौथी पनडुब्बी (submarine) है, को 25 नवंबर को नेवल डॉकयार्ड, मुंबई में कमीशन मिलेगा यानी ये चालू हो जाएंगी। दोनों को मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (Mazagon Dock Shipbuilders Limited), मुंबई में बनाया गया है।

नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल एस. एन. घोरमडे (SN ghormade) ने कहा, हम सभी जानते हैं कि समुद्री वातावरण जटिल है और यह केवल अधिक संख्या में प्लेयर्स के शामिल होने से बढ़ता है। हम ऐसे समय में रह रहे हैं, जब वैश्विक और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहे हैं और सबसे तेजी से परिवर्तन का क्षेत्र निस्संदेह हिंद महासागर (Indian Ocean) क्षेत्र है। उन्होंने कहा, इसलिए, यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास जारी हैं कि उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए भारतीय नौसेना की क्षमता बढ़ाने के लिए हमारे बल का स्तर उत्तरोत्तर बढ़ता रहे। उन्होंने सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के अनुरूप रणनीतिक स्वतंत्रता पर नौसेना के पूर्ण और केंद्रित जोर के बारे में बात की।

वाइस एडमिरल घोरमडे (Vice Admiral Ghormade) ने कहा कि नौसेना का इन-हाउस डिजाइन संगठन - नौसेना डिजाइन निदेशालय 57 वर्षों से अधिक समय से स्वदेशी डिजाइन विकसित कर रहा है, जिसमें छोटे वाहक से लेकर विमानवाहक पोत तक, 90 से अधिक जहाजों का निर्माण किया गया है। उन्होंने कहा कि ‘विशाखापत्तनम’ और ‘वेला’ की कमीशनिंग जटिल लड़ाकू प्लेटफॉर्म बनाने की स्वदेशी क्षमता को प्रदर्शित करने वाले प्रमुख मील के पत्थर हैं। नौसेना अधिकारी ने कहा कि यह पानी के ऊपर और पानी के भीतर दोनों क्षेत्रों में खतरों को दूर करने के लिए हमारी क्षमता और अग्नि शक्ति को बढ़ाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि इन दोनों प्लेटफार्मों के चालू होने से भारतीय नौसेना, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और भारतीय उद्योग के बीच युद्धपोत और पनडुब्बी (warships and submarines) डिजाइन और निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता की खोज में साझेदारी को और मजबूत किया गया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभिन्न भारतीय शिपयार्डों में नौसेना के 39 जहाजों और पनडुब्बियों का निर्माण किया जा रहा है। इन परियोजनाओं ने न केवल सहायक उद्योगों द्वारा नियोजित कर्मियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा किए हैं बल्कि पिछले वर्ष अकेले एमडीएल द्वारा निर्माण गतिविधियों से लगभग 343 एमएसएमई लाभान्वित हुए हैं। वेला कलवरी क्लास की चौथी पनडुब्बी है। पनडुब्बी ‘वेला’ को 7 मई, 2019 को लॉन्च किया गया था और इसने कोविड प्रतिबंधों के बावजूद हथियार और सेंसर परीक्षणों सहित सभी प्रमुख बंदरगाह और समुद्री परीक्षणों को पूरा कर लिया है।

इस प्रकार भारतीय नौसेना (Indian Navy) अपने शस्त्रागार में एक और शक्तिशाली प्लेटफॉर्म प्राप्त करेगी। पनडुब्बी निर्माण एक परिष्कृत अभ्यास है, जिसमें छोटे घटकों (कंपोनेंट्स) को क्रमिक रूप से और तार्किक रूप से पनडुब्बी के अंदर रखना शामिल है, क्योंकि भीतर की जगह बेहद सीमित है। बहुत कम देशों के पास अपनी औद्योगिक क्षमता में यह महारत हासिल है। वाइस एडमिरल ने कहा, भारत ने पिछले 25 वर्षों से अपनी पनडुब्बियों का निर्माण करने की अपनी क्षमता साबित की है। युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण दोनों ने भारतीय उद्योग को अत्यधिक लाभान्वित किया है क्योंकि वे भी कड़े गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को संरेखित करने में सक्षम हैं जो इन प्लेटफार्मों की मांग करते हैं।

विशाखापत्तनम श्रेणी के जहाज, जो स्वदेशी स्टील से बने हैं, पिछले दशक में कमीशन किए गए कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक जहाजों का फॉलो-अप हैं। भारतीय नौसेना के आंतरिक संगठन, नौसेना डिजाइन निदेशालय द्वारा डिजाइन किए और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, मुंबई द्वारा निर्मित; चार जहाजों का नाम देश के प्रमुख शहरों - विशाखापत्तनम, मोरमुगाओ, इंफाल और सूरत के नाम पर रखा गया है। विशाखापत्तनम की कमीशनिंग उन्नत युद्धपोतों के डिजाइन और निर्माण की क्षमता वाले राष्ट्रों के एक विशिष्ट समूह के बीच भारत की उपस्थिति की पुष्टि करेगी। इस शानदार जहाज की लंबाई 163 मीटर, चौड़ाई 17 मीटर है और इसका विस्थापन 7,400 टन है और इसे भारत में निर्मित सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में से एक कहा जा सकता है। जहाज को चार शक्तिशाली गैस टर्बाइनों द्वारा संचालित किया गया है, जो 30 समुद्री मील से अधिक की गति प्राप्त करने में सक्षम है। विशाखापत्तनम परिष्कृत अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर जैसे सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लैस है। जहाज एक आधुनिक निगरानी रडार से भी सुसज्जित है और यह जहाज परमाणु, जैविक और रासायनिक (एनबीसी) युद्ध स्थितियों के तहत लडऩे के लिए डिजाइन किया गया है।