केंद्र सरकार ने सात राज्यों के 16 कलेक्टरों को विदेशी अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिक का दर्ज़ा देने के लिए अधिकृत किया है। ये कलेक्टर नागरिकता अधिनियम 1955 के अंतर्गत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदू, सिक्ख, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों की भारतीय नागरिक बनने की अर्जी पर निर्णय लेंगे।


ये आदेश 22 दिसंबर से लागू होगा। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार रायपुर, अहमदाबाद, गांधीनगर, कच्छ, भोपाल, इंदौर, नागपुर, मुंबई, पुणे, ठाणे, जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, लखनऊ, पश्चिमी दिल्ली और दक्षिणी दिल्ली के जिला कलेक्टरों को नागरिकता की अर्जी पर विचार को अधिकृत किया गया है।


कानून में संशोधन करके तीनों पड़ोसी देशों के अल्पसंख्यक वर्ग के ऐसे नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है जो छह साल से भारत में रह रहे हैं। पहले यह नियम 12 साल के निवास का था. ऐसे विदेशी नागरिकों के पास कोई दस्तावेज होना जरूरी नहीं है।

बता दें कि इस प्रावधान से असम समेत सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों को वंचित रखा गया है। वहां रहने वाले विदेशी लोगों के लिए नागरिकता का प्रावधान अलग है। असम व दूसरे पूर्वात्तर राज्यों में इसका विरोध किया गया है। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा ने आचार संहिता का उल्लंघन किया है।