भारतीय सेना चीन को सबक सिखाने के लिए अलर्ट हो चुकी है और इसके लिए उसने लद्दाख में मोर्चा संभाल लिया है। लद्दाख की गलवान घाटी में अब युद्ध के हालात हो चुकी हैं। पिछली बार की हिंसा जैसे हालत यहां कभी भी हो सकते है जिसको लेकर अब भारतीय सेना सतर्क हो चुकी है।
गलवान में जो कुछ ऐसा पिछले 45 सालों बाद हुआ है। इतने सालों में वहां कोई गोली नहीं चली थी न ही किसी जवान की जान गई थी। ऐसा दोनों देशों के बीच संधि की वजह से था जिसमें तय किया गया था कि दोनों ही देशों के जवान बॉर्डर (LAC) पर हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इस हिंसक झड़प में चीन के जवानों ने भी जान गंवाई है। वहीं 20 साथियों को खोने का गम भारतीय जवानों को भी है। ऐसे में अब पिछली संधियों का पालन कर पाना मुश्किल हो सकता है।
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए पूर्व आर्मी चीफ जनरल वीपी मलिक ने कहा कि अगर जल्द से जल्द बातचीत से मुद्दा नहीं सुलझा तो ऐसी हिंसक झड़प बढ़ जाएंगी। मलिक कहते हैं, 'जब सैनिक आमने-सामने हों, टेंशन और गुस्से का माहौल हो तो छोटी सी घटना भी बढ़ा रूप ले सकती है।'
फिलहाल सैनिकों के बीच पैंगोंग झील पर तनाव की आशंका ज्यादा है। वहां चीन की PLA ने 8km इलाके को ब्लॉक कर दिया है। बता दें कि गलवान से पहले यहां भी सैनिकों की झड़प हुई थी। लेकिन अब जवानों के शहीद होने के बाद यह झड़प धक्कामुक्की, पत्थरबाजी और डंडों तक शायद ही सीमित रहे।