भारतीय सेना जल्द ही अरुणाचल प्रदेश के पास स्थित चीन सीमा पर अत्याधुनिक अमेरिकी हथियारों की तैनाती करेगी। इनमें चिनूक हेलिकॉप्टरों समेत एम777 अल्ट्रालाइट हॉविट्जर्स भी शामिल हैं। योजना के मुताबिक, थल सेना और वायुसेना को संयुक्त रूप से युद्धाभ्यास में शामिल होना है।  चिनूक हैवी-लिफ्ट हेलिकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में 25 मार्च को चंडीगढ़ एयरबेस में शामिल किया गया था।

इस युद्धाभ्यास का कोडनेम हिमविजय रखा गया है। इसका मकसद उत्तरपूर्व में युद्ध की क्षमताओं का परीक्षण करना है। इसमें हाल ही में गठित की गई 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स भी शामिल होगी। थलसेना और वायुसेना का यह युद्धाभ्यास वास्तविक होगा। युद्ध के दौरान थलसेना की जरूरतों को पूरा करने का वायुसेना हर संभव काम करेगी। सेना के वरिष्ठ सूत्रों ने न्यूज एजेंसी को बताया, हिमविजय एक्सरसाइज के दौरान 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स को एम777 अल्ट्रा लाइट हॉविट्जर्स मुहैया करवाई जाएगी। चूंकि युद्ध के दौरान वे दुश्मन पर हमला करने के लिए एकदम तैयार होंगे, ऐसे में उन्हें हल्की बंदूकों की जरूरत होगी।

सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने अभी तक चिनूक हेलिकॉप्टरों को उत्तर-पूर्व में तैनात नहीं किया है मगर निकट भविष्य में कुछ स्थानों पर इनकी तैनाती जरूर होगी। इसलिए युद्धाभ्यास के दौरान इन्हें भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, युद्धाभ्यास में तेजपुर बेस्ड 4 कॉर्प्स को हाई एल्टीट्यूड पर तैनात किया जाएगा। उन पर उनकी क्षेत्र की सुरक्षा का जिम्मा होगा। इसी बीच उन्हें चुनौती देने के लिए वायुसेना के द्वारा वहां 17 माउंटेन स्ट्राइक कॉर्प्स की एक ब्रिगेड साइज फोर्स (इसमें 2500 से ज्यादा सैनिक शामिल होंगे) को एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जाएगा। यही जवान आक्रमण करेंगे। जवानों को पश्चिम बंगाल से अरुणाचल प्रदेश पहुंचाया जाएगा जवानों को एयरलिफ्ट करने में वायुसेना सी-17, सी-130जे सुपर हरक्यूलिस और एएन-32 का इस्तेमाल करेगी। वायुसेना इन जवानों को पश्चिम बंगाल की बागडोगरा पोस्ट से एयरलिफ्ट करके अरुणाचल के पास स्थित वॉर जोन तक पहुंचाएगी।