रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) (DRDO) ने देश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल (Pralay missile) का बुधवार को सफल परीक्षण किया। प्रलय का परीक्षण ओडिशा में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (Dr. APJ Abdul Kalam Island) से किया गया और इसने अपने सभी लक्ष्यों को पूरा किया। 

परीक्षण के दौरान मिसाइल की सभी प्रणालियों ने सफलता के साथ काम किया और पूरी सटीकता के साथ निशाने को भेदा। नयी प्रौद्योगिकी से लैस इस मिसाइल को मोबाइल लांचर से दागा जा सकता है और यह 150 से 500 किलोमीटर तक मार (Pralay missile Range) करने में सक्षम है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी (Dr. G. Satheesh Reddy) ने मिसाइल के विकास और परीक्षण से जुडी टीमों को बधाई दी है।

‘प्रलय’ कम दूरी वाली सतह से सतह पर मार करने में सक्षम मिसाइल है, जिसकी पेलोड क्षमता 500-1,000 किलोग्राम है, जिससे यह युद्धक्षेत्र में दुश्मन को नेस्तनाबूद करने में काफी काम आ सकती है। सूत्रों का कहना है कि इस मिसाइल का जिक्र डीआरडीओ (DRDO) ने साल 2015 में किया था। उसने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि यह बैलिस्टिक मिसाइल (ballistic missile) प्रलय है, जो चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। इस मिसाइल की खासियत ये है कि इसे जमीन के साथ-साथ कन्सटर से भी दागा जा सकता है। मिसाइल इस तरह से बनाई गई है, जिससे यह अन्य कम दूरी वाली मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक घातक है। यह अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने के साथ ही उसे ध्वस्त करने की क्षमता भी रखती है।