भारत ने गुरुवार को बालासोर में ओडिशा के तट से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos supersonic cruise missile) के एक नए संस्करण का सफल परीक्षण किया। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने बताया कि ये मिसाइल नई तकनीक से लैस थी, जिसका परीक्षण सफल रहा। 

बता कि इससे पहले 11 जनवरी को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ने ब्रह्मोस (BrahMos) के एक नौसैनिक संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण किया था। डीआरडीओ ने बताया था कि मिसाइल अपने लक्ष्य को भेदने में सफल रही थी। इसके बाद केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने डीआरडीओ के अधिकारियों को सफल प्रक्षेपण के लिए बधाई दी थी। बता दें कि भारतीय नौसेना के मुताबिक इस मिसाइल का परीक्षण पश्चिमी तट के पास समुद्र में किया गया था। ब्रह्मोस मिसाइल (BrahMos missile) के समुद्र से समुद्र में हमला करने वाले वैरिएंट ने अपनी अधिकतम सीमा हासिल की और टारगेट को पूरी सटीकता के साथ ध्वस्त कर दिया।

भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने राजपुत क्लास डेस्ट्रॉयर INS Ranvir और INS Ranvijay में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर लगा रखा है। इसके अलावा तलवार क्लास फ्रिगेट INS Teg, INS Tarkash और INS Trikand में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों वाला लॉन्चर तैनात है। शिवालिक क्लास फ्रिगेट में भी ब्रह्मोस मिसाइल फिट है। कोलकाता क्लास डेस्ट्रॉयर में भी यह तैनात है। INS Visakhapatnam में सफल परीक्षण हो चुका है। इसके बाद भारतीय नौसेना नीलगिरी क्लास फ्रिगेट में भी इस मिसाइल को तैनात करेगी।बता दें कि यह भारत और रुस का संयुक्त प्रयास है। इसके तहत ब्रह्मोस एयरोस्पेस का गठन किया गया था। ब्रम्होस नाम दो नदियों से लिया गया है, जिसमें भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस का मोस्कवा शामिल है। इस मिसाइल को पनडुब्बियों, विमानों और जमीन से लॉन्च किया जा सकता है।