सिक्किम सेक्टर के डोकलाम क्षेत्र में भारत और चीन के बीच तनाव के चलते 8-15 जुलाई को होने वाली पत्रकार यात्रा को रद्द कर दिया गया है। ये जानकारी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित चाइनीज दूतावास के हवाले से दी गई है। चीन हर साल चुनिंदा भारतीय पत्रकारों के लिए तिब्बत यात्रा का आयोजन करता है। बता दें कि भारतीय सेना ने चीन द्वारा डोकलाम में सड़क निर्माण का कार्य रुकवा दिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव उच्च स्तर पर पहुंच चुका है।

बता दें कि सिक्किम से सटी भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत ने सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी है। 1962 के बाद यह पहला मौका है जब सीमा पर इतनी संख्या में सैनिकों की तैनाती की गई है। भारत ने अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए और अधिक सैनिकों को नॉन-कांबटिव मोड में लगाया है, जहां करीब एक महीने से भारतीय सैनिकों का चीनी जवानों के साथ गतिरोध बना हुआ है और यह दोनों सेनाओं के बीच 1962 के बाद से सबसे लंबा इस तरह का गतिरोध है। नॉन-काम्बैटिव मोड यानी गैर-लड़ाकू मोड में बंदूकों की नाल को जमीन की ओर रखा जाता है।  

सूत्रों के मुताबिक चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा भारतीय सेना के 2 बंकरों को नष्ट करने की आक्रामक गतिविधि के बाद भारत ने और ज्यादा जवानों को भेजा है। सूत्रों ने पहली बार दोनों सेनाओं के बीच ताजा गतिरोध के बारे में डीटेल देते हुए बताया कि 1 जून को पीएलए ने भारतीय सेना से डोका ला में 2012 में बने अपने दो बंकरों को हटाने को कहा। डोका ला भारत, भूटान और तिब्बत से सटने वाली चुम्बी घाटी के नजदीक है। 

डोका ला इलाके में भारतीय सेना कई सालों से गश्त करती रही है। सेना ने 2012 में यहां 2 बंकर बनाने का फैसला किया। सूत्रों ने बताया कि बंकरों को हटाने को लेकर 1 जून को चीन की सेना की तरफ से दी गई चेतावनी के बाद इसकी सूचना नॉर्थ बंगाल के सुकना में स्थित 33 कॉर्प्स हेडक्वॉर्टर को दी गई। इस बीच 6 जून की रात को चीन के 2 बुलडोजरों ने बंकरों को नष्ट कर दिया। उनका दावा था कि यह इलाका उनका है और इस पर भारत या भूटान का कोई हक नहीं है।

बता दें कि टकराव वाली जगह से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित पड़ोस के ब्रिगेड मुख्यालय से अतिरिक्त बलों को आठ जून को भेजा गया जिस दौरान झड़प की वजह से दोनों पक्षों के सैनिकों को मामूली चोट आईं। इलाके में स्थित पीएलए के 141 डिवीजन से उसके सैनिक पहुंचने लगे जिसके बाद भारतीय सेना ने भी अपनी स्थिति को मजबूत किया।

भारत और चीन की सेनाओं के बीच 1962 के बाद से यह सबसे लंबा गतिरोध है। पिछली बार 2013 में 21 दिन तक गतिरोध की स्थिति बनी थी जब जम्मू कश्मीर के लद्दाख में दौलत बेग ओल्डी क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा में 30 किलोमीटर अंदर डेपसांग प्लेन्स तक प्रवेश कर लिया था और इसे अपने शिनझियांग प्रांत का हिस्सा होने का दावा किया था। हालांकि उन्हें वापस खदेड़ दिया गया।

गौरतलब है कि सिक्किम मई 1976 में भारत का हिस्सा बना था और एकमात्र राज्य है, जिसकी चीन के साथ एक निर्धारित सीमा है। ये सीमा रेखा चीन के साथ 1898 में हुई एक संधि पर आधारित हैं। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद जिस इलाके में भारतीय सैनिक तैनात थे, उसे भारतीय सेना और आईटीबीपी के हवाले कर दिया गया। आईटीबीपी का एक शिविर अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर दूर स्थित है।