डेल्टा वेरिएंट ने पूरी दुनिया में खौफ पैदा कर दिया है। कोरोना का यह अवतार बहुत ही खतरनाक माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि भारत को अपने जीनोम सिक्वेंसिंग में तेजी लानी होगी क्योंकि देश में डेल्टा वेरिएंट बहुत ही तेजी आ रहा है। अगर इसकी रफ्तार को रोका नहीं गया तो देश के हालात बहुत ही ज्यादा खस्ता हो सकते हैं। डॉक्टर्स ने कहा कि टेस्टिंग को भी बढ़ाने के लिए टैकनोलजी में निवेश करना होगा।

फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स के सीनियर फेलो, फीगल डिंग ने कहा कि कई प्रकार सामने आ सकते हैं, और अगर उनकी पहचान करने में देरी होती है, तो भविष्य में न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में कई लॉकडाउन हो सकते हैं। भारत मुख्य रूप से कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट के कारण कोरोनो वायरस की एक घातक दूसरी लहर से जूझ रहा है। लेकिन अब हम पहले से ही तीसरी लहर के बारे में बात कर रहे हैं।

डेल्टा दुनिया में मचा रहा तबाही


भारत में यूके की तरह जीनोम सिक्वेंसिंग क्षमताएं नहीं हैं। बहुत कम देशों के पास विशेषज्ञता है। यह डेटा हमें पहले से वैरिएंट का पता लगाने और जानने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि डेल्टा मूल स्ट्रेन की तुलना में दोगुना खतरनाक है। इसमें अस्पताल में भर्ती होने का लगभग चार गुना अधिक जोखिम है। यह एक बहुत ही जोखिम भरा वेरिएंट है। भारत इसे लेकर लंबे समय तक अंधेरे में रहा।