संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के रूप में चुनाव में उतरने से पहले भारत ने आज अपने चार सूत्रीय एजेंडे का खुलासा किया तथा कहा कि प्रगति के नये अवसर, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई और बहुपक्षीय प्रणालियों में सुधार उसकी प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।


विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आज यहां सुरक्षा परिषद के लिए भारत की प्राथमिकताओं की एक विवरणिका जारी की। इसमें उक्त चार विषयों के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा पर एक व्यापक रुख तथा समाधान के उपकरण के तौर पर मानवीयता आधारित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने को भी प्राथमिकता देने की बात कही गयी है।


सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यता के लिए 17 जून को चुनाव होना है। अस्थायी सदस्यता दो वर्ष के लिए होती है और भारत दस साल बाद इसके लिए चुनाव में उतरा है। एशिया प्रशांत समूह से एकमात्र मान्य प्रत्याशी होने के नाते भारत की सफलता तय मानी जा रही है। इस अवसर पर डॉ. जयशंकर ने कहा कि वर्तमान समय में हम अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए चार भिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।


पहली- अंतरराष्ट्रीय शासन की सामान्य प्रक्रिया पर दबाव बढ़ रहा है, दूसरा- पारंपरिक एवं गैर पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां बेलगाम होकर बढ़ती जा रही हैं। तीसरा वैश्विक संस्थानों में पूर्ण प्रतिनिधित्व की कमी बनी हुई है इसलिए वे कम प्रभावी हैं तथा चौथा कोविड-19 की महामारी एवं उसका आर्थिक असर दुनिया पर अभूतपूर्व प्रभाव डालेगा।


डॉ. जयशंकर ने कहा कि जीतने की दशा में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का यह आठवां कार्यकाल होगा। इस असाधारण परिस्थिति में भारत एक सकारात्मक वैश्विक भूमिका निभा सकता है। हमने हमेशा ही न्यायोचित बात की है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए पारंपरिक एवं नयी चुनौतियों का जिक्र करते हुए सुरक्षा परिषद के सामने आने वाले संदर्भों पर विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि वर्तमान कोविड-19 महामारी ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एवं राजनीतिक पर्यावरण को जटिल बना दिया है। इससे वैश्विक, क्षेत्रीय एवं स्थानीय चुनौतियों का मुकाबला करने की देशों की क्षमता भी सीमित हुई है। विदेश मंत्री ने कहा कि भारत की पुरानी भूूमिका संवाद सेतु और अंतरराष्ट्रीय कानून के पैरोकार के तौर पर रही है।


इस बार भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की भूमिका को पांच 'स'- सम्मान, संवाद, सहयोग और शांति, के रूप में निर्धारित किया है जो वैश्विक समृद्धि के लिए वातावरण तैयार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यकाल में भारत का मकसद बहुपक्षीय प्रणालियों में सुधार एवं नये आचार का क्रियान्वयन रहेगा। सुरक्षा परिषद के लिए भारत की उम्मीदवारी का एशिया प्रशांत क्षेत्र के 55 देशों ने एकमत से अनुमोदन किया था जिसमें चीन एवं पाकिस्तान शामिल था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पिछले सप्ताह सुरक्षा परिषद के चुनाव कराने का निर्णय लिया था। ये चुनाव कोविड-19 महामारी के कारण नयी मतदान प्रणाली से कराये जाएंगे। कनाडा, आयरलैंड और नॉर्वे पश्चिमी यूरोप एवं अन्य श्रेणी की दो सीटों के लिए उम्मीदवार हैं। लैटिन अमेरिका एवं कैरेबियाई समूह के लिए मैक्सिको एकमात्र उम्मीदवार है।


अफ्रीकी समूह की एक सीट के लिए केन्या एवं जिबूती के बीच मुकाबला है। भारत इससे पहले 1950-1951, 1967-1968, 1972-1973, 1977-1978, 1984-1985, 1991-1992 तथा 2011-2012 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है।