सरकार ने कोविड 19 पर नियंत्रण के लिए अमेरिका को हाइड्रोक्लोरोक्विन के निर्यात की संभावना को लेकर जारी अटकलबाजी और राजनीतिक विवाद पर नाखुशी व्यक्त करते हुए कहा कि देशवासियों के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता सुनिश्चित करने के बाद ही इन दवाओं का निर्यात किया जाएगा। 

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने यहां संवाददाताओं के सवालों के जवाब में कहा, हमने देखा है कि मीडिया के एक वर्ग में कोविड 19 संबंधी दवाओं के मुद्दे पर गैर जरूरी विवाद पैदा करने की कोशिश की गयी है। एक जिम्मेदार सरकार के रूप में हमारा पहला दायित्व यह है कि हमारे लोगों की जरूरत के लिए दवाओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित हो। इसके लिए कुछ अस्थायी कदम उठाये गये और कुछ औषधियों के निर्यात को प्रतिबंधित किया गया। 

श्रीवास्तव ने कहा कि इस बीच विभिन्न परिदृश्यों में संभावित जरूरतों को लेकर एक व्यापक आंकलन किया गया। सभी संभावित आपात स्थिति में दवाओं की उपलब्धता की पुष्टि होने के बाद इन प्रतिबंधों को काफी हद तक हटा लिया गया है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने कल 14 औषधियों पर प्रतिबंध हटाने की अधिसूचना जारी की है। जहां तक पैरासीटामॉल और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का सवाल है, उन्हें लाइसेंस वाली श्रेणी में रखा गया है और उनकी मांग की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। हालांकि हमारी कंपनियों की भंडारण स्थिति के आधार पर उनके निर्यात अनुबंधों को पूरा करने की अनुमति दी जा सकती है। 

प्रवक्ता ने कहा कि कोविड 19 की व्यापकता को देखते हुए भारत ने हमेशा कहा है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुटता एवं सहयोग प्रदर्शित करना चाहिए। इस महामारी के मानवीय पहलुओं के मद्देनजर निर्णय लिया गया है कि भारत अपने उन सभी पड़ोसी देशों को पैरासीटामॉल और हाइड्रोक्लोरोक्विन समुचित मात्रा में लेने का लाइसेंस देगा। इसके अलावा हम उन देशों को भी ये आवश्यक दवाएं देंगे जो इस महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। इसलिए हम इस संबंध में किसी भी प्रकार की अटकलबाजी या इसे राजनीतिक रंग देने के प्रयासों को हतोत्साहित करेंगे।