देश ने चंद्रमा के लिए अपने दूसरे महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 को सोमवार को पृथ्वी की निर्धारित कक्षा में स्थापित कर इतिहास रच दिया। चंद्रयान-2 को देश के सबसे वजनी 43.43 मीटर लंबे जीएसएलवी-एमके3-एम1 रॉकेट से भेजा गया जिसने प्रक्षेपण के 16 मिनट में इसे पृथ्वी की पार्किंग कक्षा में पहुंचा दिया। इस शानदार उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री सहित कई नेताओं ने वैज्ञानिकों को बधाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इसरो और भारतीयों को बधाई संदेश दिया। इस मौके पर पीएम ने चंद्रयान 2 के फायदे भी गिनाए। मोदी ने ट्वीट के साथ-साथ कुछ तस्वीरें भी शेयर की हैं। इसमें मोदी खड़े होकर लॉन्च देख रहे हैं। तस्वीरें बताती हैं कि मोदी की मिशन पर पूरी नजर थी और वह भी मिशन के लिए आम भारतीय की तरह ही उत्साहित थे। इसरो के इस कारनामे का राज्यसभा और लोकसभा में भी जिक्र हुआ।

पीएम मोदी ने अपने पहले ट्वीट में लिखा, 'अपने गौरवमय इतिहास में भारत ने कुछ शानदार पल और जोड़े। चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग हमारे वैज्ञानिकों की ताकत और 130 करोड़ भारतीयों के दृढ़ निश्चय को दिखाती है।' दूसरे ट्वीट में मोदी ने बताया कि चंद्रयान 2 पूर्णत: स्वदेशी है। उन्होंने लिखा, 'चंद्रयान 2 की जो बात भारतीयों को और ज्यादा उत्साहित करती है वह यह कि यह पूर्णत स्वदेशी है। इसके अंदर एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर है जो चांद की समीक्षा करेंगे।'

असम के वित्त मंत्री व भाजपा नेता हिमंता विश्व शर्मा ने लिखा, एक मिशन जो प्रेरणा, नवाचार और खोज का एक प्रतीक है। चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण के लिए टीम को बधाई। वास्तव में एक गर्वित क्षण! अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा 'चंद्रयान 2 को संभव बनाने के लिए आपको नमस्कार माननीय पीएम, सबसे खूबसूरत क्षणों में से एक पर कब्जा कर लिया! त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा, 'चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण पर ISRO टीम को बधाई। हमने आज भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है क्योंकि यह चंद्रमा की सतह पर उतरने वाला हमारा पहला रॉकेट है। पूरे देश को आज स्वदेशी मिशन पर गर्व है।' मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने कहा, 'चंद्रयान 2 के सफल प्रक्षेपण पर माननीय पीएम इसरो की टीम को हार्दिक बधाई। यह वास्तव में सभी भारतीयों के लिए सबसे गर्व के क्षणों में से एक है।'


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एक विज्ञप्ति के अनुसार चंद्रयान-2 इस समय पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा है और इस दौरान पृथ्वी से इसकी न्यूनतम दूरी 169.7 किलोमीटर और अधिकतम दूरी 45475 किलोमीटर है। देश के करोड़ों लोगों के सपनों के साथ 3850 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 ने जीएसएलवी-एमके3-एम1 के माध्यम से अपराह्न 1443 बजे शानदार उड़ान भरी। इसके प्रक्षेपण के लिए उलटी गिनती 20 घंटे पहले रविवार शाम 1843 बजे शुरू हुई थी। जीएसएलवी-एमके3-एम1 की यह पहली उड़ान थी। चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) प्रक्षेपण के 16 मिनट बाद प्रक्षेपण यान से अलग हो गया और पृथ्वी की 170.06 3 40400 किलोमीटर की पार्किंग कक्षा में प्रवेश कर गया। इसके बाद उसने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंङ्क्षडग करने के लिए अपनी 30844 लाख किलोमीटर की 48 दिन की यात्रा शुरू कर दी। इसरो के अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने चंद्रयान-2 के सफल प्रक्षेपण के बाद मिशन कंट्रोल सेंटर से वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए इस चुनौतीपूर्ण मिशन में शामिल पूरी टीम को बधाई दी और उन्हें सैल्यूट किया। उन्होंने कहा कि यह चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की भारत की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है।डॉ. सिवन ने कहा, 'आज का दिन भारत में अंतरिक्ष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए ऐतिहासिक दिन है। मुझे यह घोषणा करते हुए बेहद खुशी हो रही है कि जीएसएलवी-एमके3-एम1 ने चंद्रयान-2 को निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया है। वास्तव में यह भारत की चांद और उसके दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की ओर ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है जो वैज्ञानिक प्रयोगों और खोजों के लिए की जा रही है।'उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 में एक गंभीर तकनीकी खराबी के कारण 15 जुलाई को इसका प्रक्षेपण टाल दिया था। हमने उस खराबी को दुरुस्त कर लिया और टीम इसरो ने पूरे उत्साह के साथ चंद्रयान के प्रक्षेपण को अंजाम तक पहुंचाया। डॉ. सिवन ने कहा, 'खराबी का पता चलते ही इसरो की पूरी टीम हरकत में आ गयी। इस केंद्र में अगले 24 घंटों के दौरान शानदार काम किया गया। टीम ने गड़बड़ के मूल कारणों का पता लगा लिया और उसे ठीक भी कर लिया। सब कुछ 24 घंटों के भीतर हो गया।'उन्होंने बताया कि अगले डेढ़ दिन में सभी तरह के परीक्षण किये गये और अन्य तैयारियां की गयीं। यह प्रक्षेपण इसरो की मेहनती टीम के कारण संभव हो पाया है। इसरो के विशेषज्ञ प्रक्षेपण टलने के बाद से पिछले सात दिन से लगातार काम कर रहे थे।
इस मिशन में चंद्रयान के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यानी वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं। इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, राडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी सटीक दूरी पता लगाना है। चंद्रयान-2 एक ऐसे मिशन पर रवाना हुआ है जहां अब तक कोई देश नहीं पहुंच सका है। लगभग एक दशक तक चले वैज्ञानिक अनुसंधानों और इंजीनियरिंग विकास के साथ चंद्रयान-2 चांद के अनछुए हिस्से दक्षिणी ध्रुव पर रोशनी डालेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने अपने दूसरे मिशन में सॉफ्ट लैंडिंग का लक्ष्य रखा है। लैंडर दो मीटर प्रति सेकेंड की बेहद धीमी गति से चंद्रमा पर उतरेगा। केवल तीन देशों रूस, अमेरिका और चीन ने ही अब तक चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग की है। इससे पहले चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण 15 जुलाई को किया जाना था लेकिन तकनीकी खराबी आने के कारण इसे टाल दिया गया। इसरो ने 18 जुलाई को घोषणा की थी कि विशेषज्ञ समिति ने तकनीकी खराबी के कारण का पता लगा लिया है और उसे ठीक भी कर लिया गया है।

यह मिशन इसरो के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक है। आज तक दुनिया के किसी अन्य देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना मिशन नहीं भेजा है। भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण 22 अक्टूबर 2008 में किया गया था। इससे चांद की सतह पर पानी की मौजूदगी का पता लगाया गया है। चंद्रयान-2 प्रक्षेपण के बाद पहले 23 दिन पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा जहाँ से अगले पांच दिन में इसे चाँद की कक्षा में स्थानांतरित किया जायेगा। चंद्रयान-2 का लैंडर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मैनजिनस सी और सम्पेलस एन क्रेटरों के बीच उतरेगा।

इसरो के अनुसार, पहले 23 दिन पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में स्थानांतरित करने वाले वक्र पथ पर डाला जायेगा। तीसवें दिन यह चंद्रमा की कक्षा में पहुंच जायेगा। वहाँ अगले 13 दिन तक चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। तैंतालिसवें दिन लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए ऑर्बिटर से अलग हो जायेगा जबकि ऑर्बिटर उसी कक्षा में चक्कर लगता रहेगा। चौवालिसवें दिन से लैंडर की गति कम की जायेगी और 48वें दिन वह चंद्रमा पर उतरेगा। चंद्रयान का लैंडर सात सितंबर के आसपास चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मैनजिनस सी और सिम्पेलियस एन क्रेटरों के बीच उतरेगा।

ऑर्बिटर का वजन 2379 किलोग्राम है। इसमें 1000 वाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता है। इसमें आठ वैज्ञानिक उपकरण यानी पेलोड हैं जो विभिन्न आँकड़े जुटायेंगे। यह एक साल तक चंद्रमा की कक्षा में रहेगा। लैंडर, जिसे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम नाम दिया गया है, चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। यह एक चंद्र दिवस यानी करीब 14 दिन तक आंकड़े जुटाने का काम करेगा। इस पर चार पेलोड हैं। इसका वजन 1471 किलोग्राम है और यह 650 वाट बिजली उत्पन्न कर सकता है। रोवर को प्रज्ञान नाम दिया गया है। इसका वजन 27 किलोग्राम है और इसमें छह पहिये लगे हैं। यह लैंडर से 500 मीटर के दायरे में चक्कर लगा सकता है। इस दौरान इसकी गति एक सेंटीमीटर प्रति सेकेंड होगी। इस पर दो पेलोड हैं। ऑर्बिटर और लैंडर बेंगलुरु के पास ब्यालालू स्थित इंडियन डीप सी नेटवर्क नामक इसरो के नियंत्रण कक्ष से सीधे संपर्क में रहेंगे। ये आपस में भी संवाद कर सकेंगे। रोवर लैंडर के साथ संवाद करेगा।