देश को मोबाइल फोन सहित इलेक्ट्रानिक्स विनिर्माण का वैश्विक केन्द्र बनाने की केन्द्र सरकार की कोशिशों से चालू वित्त वर्ष में भारत निर्मित मोबाइल फोन का निर्यात 75 प्रतिशत बढ़कर 5.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। इस क्षेत्र में कार्यरत कंपनियों के शीर्ष संगठन इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रानिक्स एसोसियेशन द्वारा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020-21 में 3.16 अरब डॉलर के मोबाइल फोन निर्यात हुआ था जो चालू वित्त वर्ष में बढ़कर 5.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। 

संगठन ने कहा कि एक अप्रैल 2020 से लागू स्मार्टफोन पीएलआई स्कीम के बल पर यह उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल हुआ है। अब इस क्षेत्र में भारत का वैश्विक निर्यात में हिस्सेदारी बढऩे लगी है। वर्ष 2020 में कोरोना की लहरों के कारण अनिश्चितता में की गयी शुरूआत में वर्ष 2021 में स्थिरता आयी है और अब उसका परिणाम मिलने लगा है जो अनुमान को भी पार कर गया है। 

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संगठन ने कहा कि स्मार्टफोन पीएलआई से पांच वैश्विक कंपनियां सैंमसंग, फॉक्सकॉन होन हई, रिसिंग स्टार, विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के साथ ही भारतीय कंपनियों लावा, माइक्रोमैक्स (भगवती), पेडगैट इलेक्ट्रानिक्स, यूटीएल नियोल्लक्स और ऑप्टिमस इलेक्ट्रानिक्स ने स्मार्टफोन का विनिर्माण शुरू किया है। 

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पांच वर्षां की इस स्कीम में कंपनियों के 10.5 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का अनुमान है जिसमें निर्यात की हिस्सेदारी 6.5 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस अवधि में आठ लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है जिसमें दो लाख प्रत्यक्ष और छह लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल है।