केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया है. सरकार ने मुखौटा कंपनियों यानी निष्क्रिय कंपनियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का फैसला किया है. सरकार के निशाने पर एक दो नहीं, कुल 40 हजार ऐसी कंपनियां हैं, जिनपर गाज गिरने वाली है. दरअसल, कॉरपोरेट मंत्रालय ने 40 हजार से ज्‍यादा कंपनियों का रजिस्‍ट्रेशन कैंसिल करने फैसला लिया है. इनमें से सबसे ज्‍यादा कंपनियां दिल्‍ली और हरियाणा में पंजीकृत हैं. इन दोनों राज्यों में 7500 से अधिक मुखौटा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं.

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एक रिपोर्ट के मुताबिक कॉरपोरेट मंत्रालय ने ऐसी कंपनियों की छंटनी की है, जिनका कारोबार 6 महीने से निष्क्रिय रहा है. ऐसी कंपनियों का लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया गया है. साथ ही उनपर कार्रवाई की भी तैयारी है. रिपोर्ट के मुताबिक मामले से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इन मुखौटे कंपनियों के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग जैसी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का अंदेशा है. 

रिपोर्ट के अनुसार इन कंपनियों का इस्तेमाल गलत तरीके से विदेश पैसे पहुंचाने का काम किया जाता है. यानी इन कंपनियों में काली कमाई का जमकर इस्‍तेमाल होता है. बता दें, सरकार लगातार ऐसी कंपनियों को चिन्हित कर कार्रवाई करती है. बीते साल भी ऐसी ही हजारों कंपनियों पर गाज गिरी थीं.     

एक अधिकारी के मुताबिक Registrar of Companies (RoC) उन कंपनियों पर एक्शन लेती हैं, जो करीब दो साल से कोई कामकाज नहीं कर रही हैं, साथ ही ऐसी कंपनियां जो इस दौरान कारोबार का डेटा शेयर नहीं करती हैं. लेकिन, इस बार केवल 6 महीने से निष्क्रिय कंपनियों को भी चुना गया है.

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बता दें, नोटबंदी के बाद से ही सरकार मुखौटा कंपनियों पर तेज कार्रवाई कर रही है. शक है कि इनमें कालेधन का  इस्तेमाल होता है. कॉरपोरेट मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में करीब 23 लाख कंपनियां रजिस्‍टर्ड हैं, जिसमें से अभी करीब 14 लाख कंपनियां ही कामकाज कर रही हैं. आंकड़े बताते हैं कि अब तक करीब 8 लाख कंपनियां अपना कारोबार बंद कर चुकी हैं.

सरकार ने मुखौटा कंपनियों पर केवल ताला लगाने का फैसला ही नहीं किया है, बल्कि उनपर सरकार की जो भी देनदारी है, उसे भी वसूला जाएगा. मामले से जुडे़ अधिकारी ने बताया कि ऐसी कंपनियों और उनके निदेशकों पर बकाए को खत्‍म नहीं किया जाएगा, साथ ही अगर कंपनी की ओर से कोई लेनदेन हुआ है तो उसके निदेशक और कंपनी के प्रतिनिधि को जवाब-तलब किया जाएगा. यानी इन कंपनियों पर ताला लगाने के बाद भी इनसे बकाया वसूलने में कोताही नहीं की जाएगी.