बांग्‍लादेश अभी अपनी स्‍वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ का उत्सव मना रहा है। राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खुद ढाका जाकर बांग्‍लादेश को शुभकामनाएं दी हैं। भारत की ओर से बांग्‍लादेश के राष्‍ट्रीय म्‍यूजियम को एक खास तोहफा दिया गया। यह तोहफा 1971 युग का एक मिग-21 एयरक्राफ्ट है। राष्‍ट्रपति कोविंद ने अपने ढाका दौरे पर इसी एयरक्राफ्ट का एक रेप्लिका बांग्‍लादेश के राष्‍ट्रपति अब्‍दुल हमीद को सौंपी है। मिग-21 विमानों की भारतीय वायुसेना के इतिहास में अहम जगह रही है। 1971 की जंग में ये मिग-21 लड़ाकू विमान ही थे जिनकी वजह से पाकिस्‍तान को हवा तो दूर, जमीन पर भी आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला।

1971 का वह युद्ध एक तरह से भारतीय वायुसेना के पराक्रम का पहला वैश्विक प्रदर्शन साबित हुआ। भारतीय वायुसेना (IAF) ने मिग-21 विमानों के जरिए पाकिस्‍तान के छक्‍के छुड़ा दिए। मोर्चों पर पाकिस्‍तानी सैनिक टैंक, गाड़‍ियां छोड़कर भाग रहे थे तो पाकिस्‍तान एयरफोर्स के लड़ाकू विमान MiG-21 से खुद को बचाने में नाकाम साबित होते। MiG-21 विमानों ने पाकिस्‍तान का कितना नुकसान किया उसका अंदाजा इस बात से लगाया गया कि पूरे युद्ध में भारत का केवल एक मिग-21 बर्बाद हुआ जबकि पाकिस्‍तान ने अपने 13 लड़ाकू विमान खो दिए।

मिग-21 फाइटर जेट्स में सवार होकर भारतीय एयरफोर्स के जांबाज पायलट्स ने पाकिस्‍तान की नाक में दम कर दिया। 1971 की जंग में मिग-21 विमानों ने पाकिस्‍तानी एयरफोर्स के सात F-104 A स्‍टारफाइटर्स, दो F-86 सेबर, दो F-6 (मिग-19), एक मिराज III EP और एक C-130 B हरक्‍यूलिस को उड़ाया। इसके अलावा इन विमानों की मदद से रणनीतिक रूप से अहम PAF एयरफील्‍ड्स, रडार स्‍टेशंस समेत कई सैन्‍य ठिकानों को निशाना बनाया गया। यहां तक कि ढाका में मौजूद गवर्नर के आवास को भी। 1971 की जंग में MiG-21 का जलवा कुछ ऐसा था कि उसके बाद इनका नाम 'त्रिशूल' पड़ गया।