India Gate पर स्थापित Amar Jawan Jyoti की मशाल की लौ नेशनल वॉर मेमोरियल की लौ में मिलाई जा रही है। इसको लेकर कांग्रेस समेत तमाम विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर हो गए हैं। उनका कहना है कि 5 दशकों से जल रही अमर जवान ज्योति को बुझाया जा रहा है। लेकिन मोदी सरकार ने कहा है कि इस ज्योति की लौ को बुझाया नहीं जा रहा है, बल्कि नेशनल वॉर मेमोरियल की लौ के साथ मिलाया जा रहा है। लेकिन कई लोगों को नहीं पता कि अमर जवान ज्योति की कहानी क्या है। ऐसे में आपको इसके बारे में सबकुछ बता रहे हैं।

आपको बता दें कि भव्य इंडिया गेट का निर्माण अंग्रेजों ने करवाया था। भारत में अंग्रेस सरकार ने 1914 से 1921 के बीच जान गंवाने वाले ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की याद में इसें बनाया था। 1914 से 1918 तक प्रथम विश्व युद्ध में और 1919 में तीसरे एंग्लो-अफगान युद्ध में 80 हजार से ज्यादा भारतीय सैनिक शहीद हुए थे जिनको श्रद्धांजलि देने के लिए इसें बनाया गया था।

भव्य इंडिया गेट का डिजाइन एडविन लुटियन ने बनाया था। इसकी नींव 10 फरवरी 1921 को रखी गई थी। इंडिया गेट 10 साल में बनकर तैयार हुआ था। इस समय 12 फरवरी 1931 को तत्कालीन वायसराय लॉर्ड इर्विन ने इसका उद्घाटन किया था।

इसके बाद भारत आजाद होने के बाद दिसंबर 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। यह युद्ध 3 से 16 दिसंबर तक चला जिसें पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिए गए। हालांकि, इस युद्ध में भारतीय जवान भी शहीद हुए जिनकी संख्या 3,843 थी। इन्हीं शहीदों की याद में अमर जवान ज्योति जलाने का फैसला किया गया।

इसी फैसले के तहत इंडिया गेट के नीचे एक काले रंग का स्मारक बनाया गया, जिस पर अमर जवान लिखा है। इस स्मारक पर L1A1 सेल्फ लोडिंग राइफल भी रखी हुई है। इसी राइफल पर एक सैनिक हेलमेट भी लगा है।

इसका उद्घाटन 26 जनवरी 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था। इस स्मारक में एक ज्योति भी जल रही है। 2006 तक इस ज्योति को जलाने के लिए एलपीजी का इस्तेमाल किया जाता था लेकिन बाद में इसमें सीएनजी का इस्तेमाल किया जाने लगा।

लेकिन अब यह ज्योति नेशनल वॉर मेमोरियल में जलाई जाएगी। नेशनल वॉर मेमोरियल इंडिया गेट से 400 मीटर की दूरी पर ही बना है। यहां भी ज्योति जल रही है। यह वॉर मेमोरियल 40 एकड़ में बना है जिसकी दीवारों पर शहीद जवानों के नाम लिखे हैं।