भारत को चीन और पाकिस्‍तान के साथ खतरा सिर्फ जमीनी सीमा तक सीमित नहीं, समुद्र तक भी पहुंच रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र में चीन लगातार अपनी नौसेना को मजबूत कर रहा है, पाकिस्‍तान की जंगी क्षमता भी दुरुस्‍त कर रहा है। ताकि भारत को उसके घर में दो तरफ से घेरा जा सके। भारतीय सुरक्षा व्‍यवस्‍था से जुड़े अधिकारियों की माने तो चीन हिंद महासागर में ट्विन अप्रोच अपना रहा है। पाकिस्‍तान की मदद के साथ वह अपने लिए और बेस ढूंढ रहा है ताकि लॉजिस्टिक्‍स की तानाशाही दिखा सके।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, अगस्‍त 2017 में अफ्रीका के ज‍िबूती में पहला बेस बनाने के बाद चीन आईओआर में और मिलिट्री बेस बनाना चाहता है। उसके कराची और ग्‍वादर पोर्ट पर बेस पहले से ही हैं। चीन ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि उसके जंगी जहाजों और पनडुब्बियों की ऑपरेशनल रीच बढ़ाई जा सके। हालांकि भारत आईओआर में चीन और पाकिस्‍तान, दोनों को एक साथ मात दे सकता है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर मलाका स्‍ट्रेट के जरिए चीन की सप्‍लाई को चोक किया जा सकता है। फिर भी भारत को अपनी बढ़त बरकरार रखने के लिए सिस्टमैटिकली प्‍लान करना होगा।

पाकिस्‍तान को अगले साल चीन की तरफ से 8 युआन-क्‍लास डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां मिलेंगी जिनमें एयर इंडिपेंडेंट प्रपल्‍शन सिस्‍टम लगा होगा। करीब सात बिलियन डॉलर के इस सौदे के तहत पाकिस्‍तान को 4 टाइप-054ए मल्‍टी-रोल स्‍टेल्‍थ फ्रिजेट्स और अन्‍य नेवल प्‍लैटफॉम्र्‍स व वेपंस मिलने हैं। चीन पर पाकिस्‍तान की निर्भरता कितनी है, इसका पता इससे चलता है कि उसके 70 फीसदी से ज्‍यादा हथ‍ियार ड्रैगन सप्‍लाई करता है।

पीपुल्‍स लिबरेशन आर्मी-नेवी ने पिछले दशक में ही 117 बड़े जंगी जहाज कमिशन किए हैं। उसके पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स पहले से हैं, दो बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा उसके पास 33 डिस्‍ट्रॉयर्स, 54 फ्रिजेट्स, 42 कॉर्वेट्स, 50 डीजल-इलेक्ट्रिक और 10 न्‍यूक्लियर पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा वह टाइप-075 लैंडिंग प्‍लैटफॉर्म डॉक्‍स जैसे जंगी जहाज भी बना रहा है जो उससे समुद्री इलाकों में उसकी क्षमता को और बढ़ा देंगे।

भारत के पास 140 जंगी जहाज हैं और आईओआर में उसके पास भौगोलिक एडवांटेज है। मगर उसके पास केवल एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 10 डिस्‍ट्रॉयर, 14 फ्रिजेट्स, 11 कॉर्वेट्स के अलावा 15 डीजल-इलेक्ट्रिक और दो न्‍यूक्लियर-पावर्ड पनडुब्बियां हैं। पाकिस्‍तान नेवी जिस तरह से आधुनिकीकरण में लगी है, उससे भारत को चिंता होना लाजिमी है। पड़ोसी मुल्‍क के पास अभी केवल 9 फ्रिजेट्स, पांच पनडुब्बियां, 10 मिसाइल बोट और तीन मिनीस्‍वीपर्स हैं। मगर चीन से उसे 2021-22 तक चार नए स्‍टेल्‍थ फ्रिजेट्स मिलने हैं, जिनकी क्षमता चार हजार नॉटिकल मील तक है। इसके अलावा चीन उसे पनडुब्बियां भी देगा। पाकिस्‍तान ने अपनी पांच पनडुब्बियों को अपग्रेड भी कराया है। इसके अलावा उसे चार ऐंटी-सबमरीज वॉरफेयर कॉर्वेट्स भी तुर्की से मिलने वाली हैं।