भारत ने ब्रिटेन द्वारा आगामी 4 अक्टूबर से लागू किए जा रहे नए वैक्सीन रूल पर नाराजगी जाहिर की है।  भारत ने ब्रिटेन की विदेश सचिव से मुलाकात के दौरान यह नाराजगी दर्ज कराई।  साथ ही भारत ने मंगलवार को दोनों देशों के पारस्परिक हित में ब्रिटेन में कोविड-19 क्वारंटाइन के मुद्दे को जल्द से जल्द समाधान के रास्ते पर ले जाने की अपील की। 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर लिखा- ब्रिटेन की नई  विदेश सचिव से मिलकर खुशी हुई।  साल 2030 तक के रोडमैप की प्रगति पर चर्चा हुई।  व्यापार के मुद्दे पर उनकी सराहना करते हुए अफगानिस्तान और इंडो-पैसिफिक के घटनाक्रम पर विचार विमर्श हुआ।  आपसी हित में क्वारंटाइन के मुद्दे का  शीघ्र समाधान का आग्रह किया। 

बता दें ब्रिटेन ने कोविड-19 जोखिम स्तर के आधार पर, देशों के लिए तय विभिन्न श्रेणियों में से अधिकतर को चार अक्टूबर से खत्म करने का फैसला किया है।  इससे भारत को फायदा होगा और अब ब्रिटेन में टीके की खुराक लेने वाले भारतीय प्रवासियों पर अनिवार्य पीसीआर जांच के संबंध में कम भार आएगा। 

हालांकि, उन देशों की विस्तृत सूची में भारत का नाम नहीं है, जिनके टीकों को इंग्लैंड में मान्यता प्राप्त है।  इसका मतलब है कि उन भारतीयों को अब भी रवाना होने से पहले पीसीआर जांच और ब्रिटेन पहुंचने पर भी आगे जांच से गुजरना होगा, जिन्होंने कोविशील्ड (सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका टीका) की खुराक ली है। 

उधर ब्रिटेन ने सोमवार को कहा कि वह भारतीय प्राधिकारियों द्वारा जारी कोविड-19 रोधी टीकाकरण प्रमाण पत्र की स्वीकार्यता को विस्तार देने पर भारत के साथ चर्चा कर रहा है।  ब्रिटेन के नए यात्रा नियमों की आलोचना के बीच ब्रिटिश उच्चायोग के एक प्रवक्ता का यह बयान आया है। 

नए नियमों के तहत जिन भारतीय यात्रियों ने सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित कोविशील्ड टीके की दोनों खुराक ली हैं उन्हें टीका लिया हुआ नहीं माना जाएगा और उन्हें 10 दिन के लिए पृथक-वास में रहना होगा।  चार अक्टूबर से लागू होने वाले नियमों को लेकर भारत में चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने कहा कि ब्रिटेन इस मुद्दे पर भारत से बातचीत कर रहा है और जितनी जल्दी संभव हो सके अंतरराष्ट्रीय यात्रा को फिर से खोलने के प्रति प्रतिबद्ध है।