आज होने वाली दोनों देशों के कमांडरों की बैठक से पहले चीन पर दबाव बनाते हुए भारत ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत ने बोफोर्स तोपों की तैनाती शुरू कर दी है। लेह से करीब 60 बोफोर्स तोपों को एलएसी की ओर रवाना किया गया है। सूत्रों के अनुसार एलएसी के उस पार चीन ने भी आर्टिलरी का अमला तैनात किया है। उधर, चीन- भारत सीमा पर चौकसी रखने वाले अपने वैस्टर्न थिएटर कमांड बलों के लिए चीन ने नए सैन्य कमांडर की नियुक्ति की है। लेफ्टिनेंट जनरल शू किलिंग को उसके सीमा बलों का नया कमांडर बनाया गया है। आज होने वाली दोनों देशों के कमांडरों की बैठक में पहली बार पूरे विवाद पर समग्र वार्ता होगी।


पूर्वी लद्दाख में महीने भर से जारी सीमा गतिरोध को हल करने के अपने पहले बड़े प्रयास के तहत भारत और चीन की सेनाएं शनिवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तरीय बातचीत करेंगी। हालांकि दोनों सेनाएं ऊंचाई वाले क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में आक्रामक मुद्रा में बनी हुयी हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह करेंगे। सिंह लेह स्थित 14वीं कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग हैं। चीनी पक्ष का नेतृत्व तिब्बत सैन्य जिला कमांडर करेंगे। यह बातचीत पूर्वी लद्दाख के चुशूल सेक्टर में, मालदो में सीमा कर्मी बैठक स्थान पर सुबह करीब आठ बजे से होगी। सूत्रों ने कहा कि भारत को बैठक से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है लेकिन वह इसे महत्वपूर्ण मानता है क्योंकि उच्च-स्तरीय सैन्य संवाद गतिरोध के हल के लिए मार्ग प्रशस्त कर सकता है। दोनों पक्षों के मध्य पहले ही स्थानीय कमांडरों के बीच कम से कम 12 दौर की तथा मेजर जनरल स्तरीय अधिकारियों के बीच तीन दौर की बातचीत पहले भी हो चुकी है। लेकिन चर्चा से कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला।


चीन पैंगोंग त्सो और गलवान घाटी में लगभग 2,500 सैनिकों को तैनात करने के अलावा धीरे-धीरे अस्थायी बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है और हथियारों की तैनाती बढ़ा रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के सैनिकों के बीच लगभग चार सप्ताह से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनातनी चली आ रही है। दोनों देशों के सैनिक गत पांच मई को पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो क्षेत्र में लोहे की छड़ और लाठी-डंडे लेकर आपस में भिड़ गए थे। उनके बीच पथराव भी हुआ था। इस घटना में दोनों पक्षों के सैनिक घायल हुए थे। पांच मई की शाम को चीन और भारत के 250 सैनिकों के बीच हुई यह हिंसा अगले दिन भी जारी रही।


भारत की चीन से मौजूदा सीमा विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए पहली बार दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच बातचीत हुई। संयुक्त सचिव स्तर की हुई बातचीत में दोनों देशों ने एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हुए विवादों के निपटारे पर जोर दिया। खास बात यह है कि पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव का एक महीना होने के बाद दोनों देशों के बीच इतने बड़े स्तर पर बातचीत हुई है। विदेश मंत्रालय ने ज्वाइंट सैक्रेटरी स्तर पर वीडियो कांफ्रैंसिंग के जरिए हुई बातचीत का ब्यौरा देते हुए कहा कि दोनों पक्षों ने ताजा हालात समेत विभिन्न द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा की।