रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने यूक्रेन चार इलाकों पर कब्जा कर उसे अपने देश में शामिल कर लिया है। रूस के इस कदम से अमरीका, ब्रिटेन सहित कई पश्चिमी देश भड़क गए हैं। ऐसे में अमरीका और अल्बानिया संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ एक प्रस्ताव लेकर आए। इस प्रस्ताव को 10 देशों का समर्थन मिला, लेकिन भारत, चीन, ब्राजील और गैबॉन ने इस प्रस्ताव से दूरी बनाते हुए वोट ही नहीं किया। हालांकि अंत में रूस ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

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इस प्रस्ताव में रूस के ‘अवैध जनमत संग्रह’ और यूक्रेनी क्षेत्रों पर उसके कब्जे की निंदा की गई थी। प्रस्ताव में मांग की गई थी कि रूस यूक्रेन से अपने बलों को तत्काल वापस बुलाए। इसके बाद रूस ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को वीटो कर दिया, जिससे वह पास नहीं हो पाया। वहीं यह भी साफ हो गया है कि भारत और चीन अपने पुराने दोस्त रूस को भी संकट की स्थिति में अधर में छोड़ने को तैयार नहीं है।

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संयुक्त राज्य अमेरिका और अल्बानिया द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर यूएनएससी में भारत का पक्ष रखते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने शांति, कूटनीति और संवाद की बात कही। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में हाल के घटनाक्रम से भारत बहुत परेशान है। बाद में उन्होंने कहा कि "स्थिति की समग्रता" को देखते हुए भारत वोटिंग से दूर रहा।