साल 2022 का वो समय आ गया है जब टैक्सपेयर के अंदर टैक्स बचाने के लिए निवेश करने की बात मन में आती है। धारा 80C तक्सपैयर्स को निवेश करने के विकल्पों की व्यापक रेंज देता है। इसके जरिए आप 1.5 लाख रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं। इसके लिए विकल्प कई हैं। इसे ध्यान में रखते हुए हम आपको लागत, सुरक्षा, रिटर्न और लॉक-इन अवधि के हिसाब से उपलब्ध विकल्पों के बारे में बता रहें हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
यह सबसे लोकप्रिय टैक्स सेविंग विकल्पों में से एक है। इसमें निवेश, निकासी, सॉवरिन गारंटी और टैक्स छूट जैसी विशेषताएं हैं। पीपीएफ 15 साल के लॉक-इन के साथ आता है, इसके बाद आप अपने निवेश को 5 साल के ब्लॉक में बढ़ाने का विकल्प चुनते हैं। इस मौजूदा ब्याज दर 7.1% है, जो इसे बैंक सावधि जमा (एफडी) से बेहतर बनाती है।

टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट
5 साल की टैक्स-सेविंग एफडी में किया गया निवेश कटौती योग्य होता है, इस पर अर्जित ब्याज पूरी तरह से टैक्सेबल होता है और स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के अधीन है। कर योग्य ब्याज एक हद तक निवेश पर प्राप्त कर लाभ की भरपाई कर सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो 30% टैक्स ब्रैकेट में हैं।

राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र
राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र या एनएससी गारंटीड रिटर्न प्रदान करता है। इसको सरकार द्वारा तिमाही आधार पर रिवाइज किया जाता है। इस पर 5 साल का लॉक-इन होता है और इससे मिलने वाले ब्याज को धारा 80 सी के तहत कटौती लिए दावा किया जा सकता है। निवेशक को ब्याज का भुगतान नहीं किया जाता है और इसके बजाय पुनर्निवेश किया जाता है।

पारंपरिक बीमा योजना
जनवरी-मार्च की अवधि के दौरान जीवन बीमा योजनाओं की सबसे अधिक बिक्री होती है, इस समय टैक्सपेयर  टैक्स बचत के लिए निवेश करने की जल्दी में होते हैं। एजेंट प्रीमियम पर कटौती, परिपक्वता पर कर-मुक्त आय और बीमा कवर का वादा करते हैं।

ईएलएसएस
फाइनेंसियल एडवाइजर इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम को सर्वोत्तम टैक्स-बचत निवेश के रूप में निवेश करने की सलाह देते हैं। प्रबलीन बाजपेयी के कहना है, "ईएलएसएस लंबी अवधि में इक्विटी के साथ एसेट के निर्माण की पेशकश करते हुए टैक्स बचाने में मदद करता है।" ELSS फंड में सभी 80C निवेशों में सबसे कम 3 साल का लॉक-इन होता है, और वे फ्लेक्सिबल भी ज्यादा होते हैं।

यूलिप
यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) बाजार से जुड़े बीमा प्रोडक्ट हैं। प्रीमियम धारा 80C के तहत कटौती के लिए योग्य है, अगर वार्षिक प्रीमियम 2.5 रूपये लाख से अधिक नहीं होता है। परिपक्वता पर आय या मृत्यु होने पर दावा टैक्स फ्री है और 5 साल के लॉक-इन के बाद आंशिक निकासी पर भी कर नहीं लगता है लेकिन यह राशि फंड मूल्य का 20% से कम होना चाहिए।

एनपीएस
वेतनभोगी मूल वेतन का 10% और सेल्फ एम्प्लॉयड टैक्सपेयर कुल सकल आय का 20% एनपीएस (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) टियर -1 में किए निवेश को कटौती के लिए दावा कर सकते हैं।