केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए ITR Filing दाखिल करने की समय सीमा बढ़ा दी है। नौकरीपेशा वाले सभी व्यक्ति 30 सितंबर 2021 तक अपना आयकर रिटर्न भर सकते हैं। 15G और 15H फॉर्म जमा करने की भी समय सीमा भी बढ़ा दी है। पहली तिमाही के लिए डिक्लेरेशन्स अपलोड करने की डेडलाइन 30 नवंबर 2021 है। दूसरी तिमाही के लिए 31 दिसंबर है।

क्या होता है फॉर्म 15G और 15H
फॉर्म 15G और 15H के जरिए कोई शख्स ये बताता है कि उसकी इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती है, इसलिए उससे टैक्स न लिया जाए। 15H 60 साल और उससे ऊपर के सीनियर सिटिजन के लिए होता है जबकि 15G अन्य लोग भर सकते हैं। ये एक ही साल के लिए ही मान्य होता है इसलिए इन फॉर्म को हर वित्त वर्ष की शुरुआत में ही भरना चाहिए। इससे बैंक आपकी ब्याज की आय में टीडीएस की कटौती नहीं करेंगे।

अगर आपकी इनकम 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है तो जानबूझ कर इन फॉर्म को न जमा करें। चूंकि इन फॉर्म में पैन नंबर लिखना होता है इसलिए टैक्सेबल इनकम के दायरे में आने पर आप पर कार्रवाई हो सकती है। ये फॉर्म इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास नहीं भरने होते हैं। इन्हें अपने टैक्स डिडक्टर (जैसे आपकी कंपनी या नियोक्ता) के पास ही जमा कर दें। वहीं इन फॉर्म को तैयार कर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में जमा कर देते हैं।

अगर आपने वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए अबतक अपना आयकर रिटर्न नहीं किया है, तो 30 सितंबर से पहले जरूर कर लें। समयसीमा खत्म होने के बाद रिटर्न भरने पर आपको जुर्माना देना पड़ेगा। रिटर्न ऐसे सभी लोगों को भरना जरूरी है जिनकी कम से कम 2.50 लाख रुपये सालाना कमाई है। देर से रिटर्न फाइल करने पर पांच हजार रुपये जुर्माना देना होगा। अगर दिसबंर 2021 तक भी रिटर्न फाइल नहीं किया, तो उसके बाद दस हजार रुपये जुर्माने के तौर पर वसूले जाएंगे। यही नहीं, अगर आप अपनी इनकम छिपाते हैं और रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो तीन महीने से दो साल तक की जेल भी हो सकती है। अगर इनकम टैक्स का बकाया 25 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है तो सात साल तक की जेल का भी प्रावधान है।

सरकार ने www.incometax.gov.in लॉन्च किया है। इस नए पोर्टल पर जाकर आसानी से खुद ही अपना रिटर्न भर सकते हैं। ई-फाइलिंग पोर्टल से डेटा लेकर इन ये फॉर्म में आसानी से पहले से ही भरा जा सकता है। इसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी, सैलरी इनकम, कैपिटल गेन और फॉर्म 26AS में मौजूद सभी जानकारियां शामिल हैं। यहां रिटर्न भरने से पहले पुरानी टैक्स व्यवस्था और नई टैक्स व्यवस्था में से किसी एक का चुनाव करने का भी विकल्प है।