इन दिनों आर्गेनिक खेती में कई तरह की छेड़छाड़ की जा रही है। वही पूर्वोत्तर क्षेत्र के कई हिस्सों में पूरी तरह से आर्गेनिक है। इन क्षेत्रों में खेती करने के लिए बहुत कम मात्रा में उर्वरक और कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है। मणिपुर के उखरूल जिले का एक गांव कचई है। वहां नीबू की खेती की जाती है। वहां इस क्षेत्र में आर्गेनिक खेती के लाभ को देखते हुए मृदा संरक्षण मंत्री श्याम कुमार सिंह ने हाल में ही पहली ग्रामीण सब्जी बाजार का उद्घाटन किया है। ऐसा करने से सब्जियों, फल फूलों, नीबू और बागवानी करने वाले लोगों को प्रोतसाहन मिलेगा।

उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने कहा कि अगले साल तक हम किसानों के लिए बागवानी से संबंधित उत्पादों के लिए एक पैक हाउस तैयार किया है। उन्होंने आगे कहा कि मैं अधिकारियों से बात करुंगा की कचई गांव में नीबू की खेती के लिए हर तरह की मदद प्रदान की जाए। मणीपुर में 500 किसानों के खाद और कीटनाशक सरकार की तरफ से दिए जाएंगे. इसमें से 200 किसान कचई गांव के होंगे।

परिवहन और संचार सहित बुनियादी ढांचे की कमी के बावजूद भी ग्रामीण न केवल नींबू बल्कि विभिन्न प्रकार की आर्गेनिक सब्जियों को बेचकर मिले पैसों के जरिए अपने जीवन में  सुधार करने में लगे हुए हैं। इस नए सब्जी बाजार ने इन लोगों के लिए आशा की नई किरण जगाई है। इससे महिलाओं को भी इस क्षेत्र में अवसर मिलेगा।इससे पहले गांव में कोई ऐसी सब्जी बाजार नहीं था। लोगों का कहना है कि इसके जरिए कामाई गई जीविका से वे अपने बच्चों की स्कूल फीस जमा करेंगे। ऐसा होने से वे लोग खुश हैं।

मणिपुर ऑर्गेनिक मिशन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर देबादुट्टा शर्मा एजेंसी ने कहा कि आने वाले साल में हमें पूर्ण आर्गेनिक खेती का सर्टिफिकेट एनओपी के मारफत मिल जाएगा। गांव में अत्यधिक कीटनाशकों और अन्य रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के कारण गांव में पैदा होने वाले साइट्रस एसिड में गिरावट आई है। हालांकि, प्रशिक्षण को बेहतर बनाने के लिए और गांव में बेहतर आर्गेनिक खेती के लिए इनपुट वितरित किए गए हैं। बता दें, उत्तरपूर्वी इलाकों में कांची नीबू का सबसे बड़ा उत्पादक है. यहां नीबू की खेती बिना किसी रसाइनिक उत्पाद के की जाती है।