क्‍या आपने कभी सुना है कि एक ऐसा मंदिर भी है जहां नारी रूप में हनुमान जी की मूर्ति विराजित है। जी हां बिलासपुर के रतनपुर स्थित गिरिजाबंध के इस हनुमान मंदिर में पूजा करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं।

भगवान राम के सेवक हनुमान ने आजीवन ब्रह्मचर्य का पालन किया था, ऐसे में उनकी प्रतिमा का इस रूप में होना बेहद आश्चर्य की बात है।


माना जाता है कि यह प्रतिमा करीब दस हजार साल पुरानी है। स्‍थानीय लोगों की मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से यहां उनकी पूजा करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। भास्‍कर की खबर के मुताबिक इस मंदिर बनने के पीछे भी बेहद दिलचस्‍प कहानी है। कई हजार साल पहले रतनपुर में पृथ्वी देवजू नामक राजा थे। देवजू भगवान हनुमान के बड़े भक्त थे।

एक बार राजा को कुष्ठ रोग हो गया। बहुत इलाज कराने के बाद भी यह रोग ठीक नहीं हुआ। तभी एक दिन हनुमान जी ने राजा को सपने में दर्शन दिए और मंदिर बनवाने के लिए कहा। मंदिर निर्माण का काम शुरू होते ही राजा की सेहत में सुधार होने लगा।

थोड़े दिनों बाद हनुमान जी फिर राजा के सपने में आए और महामाया कुंड में रखी प्रतिमा को मंदिर में स्‍थापित करने को कहा। स्‍त्री रूपी इस मूर्ति को देखकर हर कोई आश्‍चर्यचकित हो गया। बस उसी दिन के बाद मंदिर में हनुमान जी के इस रूप की पूजा होने लगी।