झारखंड के जिला जज की जुलाई में सुबह की सैर के दौरान एक ऑटोरिक्शा की चपेट में आने से मौत हो गई थी। अब इस मामले में सीबीआई ने झारखंड हाई कोर्ट के सामने एक बड़ा खुलासा किया है। सीबीआई ने बताया है कि सुबह की सैर पर उनको जानबूझकर मारा गया था।

एजेंसी ने कहा कि अपराध स्थल का विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज की जांच और उपलब्ध फोरेंसिक सबूतों से पता चलता है कि जज उत्तम आनंद को जानबूझकर निशाना बनाया गया और मार डाला गया। उन्हें एक चोरी के ऑटोरिक्शा से टक्कर मारी, जिसमें दो लोग मौजूद थे।

सीबीआई झारखंड उच्च न्यायालय को पूछताछ पर अपडेट जानकारी प्रदान कर रही थी। एजेंसी ने कहा कि हत्या की जांच अंतिम चरण में है। सीबीआई ने कहा कि वह अब अपने मामले को पूरा करने के लिए उपलब्ध साक्ष्यों के साथ फोरेंसिक रिपोर्ट की पुष्टि कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई ने सबूतों का अध्ययन करने के लिए देश भर से चार अलग-अलग फोरेंसिक टीमों को लगाया था। सूत्रों ने बताया कि एजेंसी गुजरात में दो आरोपियों के ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट की रिपोर्ट का भी अध्ययन कर रही है।

आरोपी (अपराध के एक दिन बाद गिरफ्तार) की पहचान ड्राइवर लखन वर्मा और उसके सहायक राहुल वर्मा के रूप में हुई। वहीं तिपहिया वाहन एक महिला के नाम दर्ज है।

सीबीआई का यह बयान कि जांच पूरी होने के करीब है, अदालत द्वारा जांच की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त करने और झारखंड के गृह सचिव और राज्य की फोरेंसिक लैब के निदेशक को जवाब देने का आदेश देने के दो सप्ताह बाद आया है।

अगस्त में सीबीआई के सूत्रों ने बताया था कि एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण सबूत खोदे हैं, जिसमें यह तथ्य भी शामिल है कि आरोपी ने अपराध करने से पहले कई कॉल करने के लिए एक रेलवे ठेकेदार से दो मोबाइल फोन चुराए थे।

49 वर्षीय उत्तम आनंद की 28 जुलाई को एक ऑटोरिक्शा की टक्कर में मौत हो गई थी। ऐसा लग रहा था कि यह हिट-एंड-रन केस हैं, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में वाहन को जज की ओर जाते हुए दिखाया गया, क्योंकि वह सड़क पर एक साइड में टहल रहे थे।

कुछ स्थानीय लोगों ने उन्‍हें खून से लथपथ पाया और अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्‍हें मृत घोषित कर दिया। वह आनंद धनबाद में माफिया हत्याओं के कई मामलों को देख रहे थे और उन्होंने दो गैंगस्टरों के जमानत अनुरोधों को खारिज कर दिया था। वह एक विधायक के करीबी से जुड़े एक हत्या के मामले की भी सुनवाई कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट ने 30 जुलाई को यह कहते हुए मामले को अपने हाथ में लिया कि इसके व्यापक प्रभाव हैं। इसके बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया, जिसने 4 अगस्त को कार्यभार संभाला।