21वीं सदी में भी देश में आज भी ऐसे पुलिस स्टेशन हैं जहां टेलीफोन नहीं हैं. जी हां आपने सही सुना,  पूर्वोत्तर के 371 पुलिस स्टेशनों के पास टेलीफोन नहीं है और उनमें से 43 के पास मोबाइल या वायरलेस डिवाइस या कनेक्टिविटी भी नहीं है।

ये आंकड़े विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति की गृह मामलों पर 'पुलिस-प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण और सुधार' पर रिपोर्ट में सामने आए थे, जिसे गुरुवार को संसद में पेश किया गया था। पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा प्रस्तुत आंकड़े 1 जनवरी, 2020 के हैं।

मेघालय के 74 पुलिस स्टेशनों में से 62 के पास टेलीफोन नहीं है और इनमें से कम से कम नौ के पास कोई वाहन या मोबाइल या वायरलेस डिवाइस भी नहीं है। मणिपुर के 84 पुलिस स्टेशनों में से 9 के पास वाहन नहीं हैं, 64 के पास टेलीफोन नहीं है, और कम से कम 11 के पास कोई वायरलेस या मोबाइल डिवाइस नहीं है।

अरुणाचल प्रदेश में, 91 पुलिस स्टेशनों में से 54 के पास कोई टेलीफोन नहीं है, जबकि कम से कम 4 पुलिस स्टेशनों में न तो वाहन हैं और न ही मोबाइल और वायरलेस डिवाइस हैं। असम में, हालांकि, 344 पुलिस स्टेशनों में से 144 के पास टेलीफोन नहीं है, कम से कम चार स्टेशनों में कोई वाहन नहीं है और उनमें से एक के पास कोई मोबाइल या वायरलेस डिवाइस नहीं है।

जबकि नागालैंड के सभी 86 पुलिस स्टेशनों में वाहन हैं, उनमें से 36 के पास टेलीफोन नहीं है, और 18 अन्य के पास मोबाइल का वायरलेस डिवाइस भी नहीं है। इसी तरह त्रिपुरा में सभी 82 पुलिस स्टेशनों में वाहन हैं और 14 के पास टेलीफोन नहीं है, लेकिन सभी के पास वायरलेस या मोबाइल डिवाइस हैं।

पूर्वोत्तर भारत में मिजोरम और सिक्किम ही दो ऐसे राज्य हैं, जिनके पास सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मिजोरम के सभी 42 पुलिस स्टेशन और सिक्किम के 29 पुलिस स्टेशन में फोन, वाहन और वायरलेस डिवाइस या मोबाइल फ़ोन उपलब्ध हैं।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि देश के 257 पुलिस थानों में वाहन नहीं हैं, 638 पुलिस स्टेशनों में टेलीफोन नहीं है और 143 पुलिस स्टेशनों में वायरलेस/मोबाइल भी नहीं है।

वर्ष 2018-19 की रिपोर्ट में कहा गया है की 21 वीं सदी के भारत में विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश, ओडिशा और पंजाब जैसे कई संवेदनशील राज्यों में टेलीफोन या उचित वायरलेस कनेक्टिविटी के बिना पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं।