असम के डिमा हसाओ में पुलिस फायरिंग के दौरान दो युवाओं की मौत के बाद लोगों ने गणतंत्र दिवस को काला दिवस के रूप में मनाया। गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले 25 जनवरी को असम में कई संगठनों ने नगा समझौते के आरएसएस द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के खिलाफ 12 घंटे के बंद का आह्वान किया था। माइबांग रेलवे स्‍टेशन पर जब प्रदर्शनकारियों ने रेल पटरियों को बाधित करने की कोशिश की तो पुलिस ने उनके ऊपर गोली चला दी।पुलिस की इस फायरिंग में दाे लोगों की मौत हो गर्इ।

मिथुन दिब्रागेड़ा और प्रबान्‍त हकमाओसा को गोली लगने के बाद गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज अस्‍पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही मिथुन की रास्‍ते में मौत हो गई जबकि प्रबान्‍त की मौत 26 जनवरी की सुबह हुई। इसके विरोध में डिमा हसाओ के लोगों ने 26 जनवरी को काला दिवस मनाने का एेलान किया। एेसी स्थिति में जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कर्फ्यू लगा दिया है।

इस पर गायक और एक्टिविस्‍ट डेनियल लांग्‍थासा ने कहा गया है, ”कर्णी सेना, शिव सेना, बजरंग दल, आरएसएस देश भर में बॉलीवुड की फिल्‍मों, पाकिस्‍तान की क्रिकेट टीम, वैलेंटाइन डे, बीफ और ऐसे ही वाहियात कारणों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं। जब असम के माइबांग कस्‍बे के नागरिक सरकार से जवाब मांगने के लिए और नगालिम के दायरे से असम को हटवाने के लिए एकाध घंटे कोई ट्रेन रोक देते हैं, जो मसला आरएसएस के एक सदस्‍य के गैर-जिम्‍मेदार बयानों के कारण सांप्रदायिक तनाव पैदा कर रहा है, तो पुलिस गोली चला देती है और निर्दोष औरतों, बच्‍चों व पुरुषों को ज़ख्‍मी कर देती और जान ले लेती है। यह गणतंत्र दिवस मेरा नहीं है।”

रिपोर्ट के मुताबिक इस फायरिंग में दस से ज्‍यादा प्रदर्शनकारियों और इतने ही पुलिसवालों को चोटें आई हैं। बता दें कि आरएसएस के नेता जगदम्‍बा मल द्वारा तैयार किए गए नगा समझौते के मसौदे में असम के डिमा हसाओ इलाके को भी जोड़े जाने का प्रस्‍ताव है, जिसका विरोध यहां के लोग और संगठन कर रहे हैं।  

 

वहीं 3 अगस्‍त 2015 को भारत सरकार के गृह मंत्रालय और एनएससीएन(आइएम) के बीच हुए नगा समझौते के बारे में कुछ भी साफ़ नहीं हो साफ नहीं हो पा रहा है कि आखिर क्या स्थिति है। इस नगा समझौते के आरएसएस द्वारा बनाए गए ड्राफ्ट को लेकर तनाव मणिपुर और नगालैंड में भी बढ़ता जा रहा है।