असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट आने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भारत सरकार हमला बोला है। कश्मीर मुद्दे पर हर जगह मुंह की खाने के बाद अब पाकिस्तान को एनआरसी का मुद्दा याद आ गया है।


इमरान खान ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा मुस्लिमों की सफाई पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। इमरान ने कहा कि कश्मीर पर भारत सरकार का जबरन कब्जा मुस्लिमों को टारगेट करने की पॉलिसी के तहत हुआ है।


गौरतलब है कि असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की अंतिम सूची शनिवार को ऑनलाइन जारी कर दी गई. इसमें करीब 19.07 लाख आवेदकों को बाहर रखा गया है।


एनआरसी के राज्य समन्वयक कार्यालय ने एक बयान में कहा कि 3,30,27,661 लोगों ने एनआरसी में शामिल होने के लिए आवेदन दिया था. इनमें से 3,11,21,004 लोगों को शामिल किया गया है और 19,06,657 लोगों को बाहर कर दिया गया है।


असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान
एनआरसी की अंतिम सूची सुबह लगभग 10 बजे ऑनलाइन जारी की गई। इसके बाद असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान करने वाली 6 साल की कार्यवाही पर विराम लग गया। असम के लोगों के लिए एनआरसी का बड़ा महत्व है क्योंकि राज्य में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेने और उन्हें वापस भेजने के लिए छह साल तक (1979-1985) आंदोलन चला था। एनआरसी को संशोधित करने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2013 में शुरू हुई। इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा किया जा रहा है।


असम में एनआरसी के संशोधन की प्रक्रिया शेष भारत से अलग है और इस पर नियम 4अ लागू होता है और नागरिकता की अनुसूची (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान कार्ड का मुद्दा) कानून, 2003 की अनुसूची लागू है। एनआरसी अथॉरिटी द्वारा शनिवार को जारी बयान के अनुसार, ‘इन नियमों को असम समझौते के अनुसार निर्धारित 24 मार्च (मध्य रात्रि) 1971 की कट-ऑफ तिथि के अनुसार तैयार किया गया है। एनआरसी आवेदन फॉर्म ग्रहण करने की प्रक्रिया 2015 में मई के अंत से शुरू हो गई और 31 अगस्त तक जारी रही। इसके लिए 68,37,660 आवेदन पत्रों के माध्यम से कुल 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया।’


ओवैसी ने बीजेपी पर बोला हमला
इस बीच एनआरसी सूची पर एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ओवैसी ने कहा है कि बीजेपी को सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा, 'उन्हें NRC के लिए हिंदू-मुस्लिम के नाम पर बात करनी बंद करनी चाहिए। उन्हें असम में जो हुआ उससे सबक लेना चाहिए। अवैध पलायनकर्ताओं का मिथक टूट चुका है।' उन्होंने आशंका जताई कि बीजेपी नागरिक संशोधन बिल के जरिए ऐसे बिल ला सकती है जिसमें वे गैर-मुस्लिमों को नागरिकता दे सकती है। उन्होंने इससे समानता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए चिंता जताई।

क्या थी जरूरत
26 मार्च 1971 को बांग्लादेश बनने के दौरान वहां से सीमावर्ती असम में घुसपैठ हुई।
असम के लोग इस घुसपैठ के खिलाफ थे, जिसमें हिंसक आंदोलन हुए।
2005 में असम सरकार ने एनआरसी अपडेट का फैसला लिया।
2010 तक इसके विरोध में आंदोलन मुखर हो गए तो इसे रोकना पड़ा।
लोग चाहते हैं कि विदेशी बाहर जाएं ताकि उन्हें ज्यादा रोजगार मिलें।


क्या है नागरिकता रजिस्टर

यह किसी राज्य या देश में रह रहे नागरिकों की विस्तृत रिपोर्ट है। भारत में पहला नागरिकता रजिस्टर 1951 में जनगणना के बाद तैयार हुआ। इस रजिस्टर में दर्ज सभी को भारत का नागरिक माना गया। यह इकलौता नागरिक ब्यौरा रजिस्टर है।


120 दिन के अंदर कर सकेंगे अपील

असम में आज जारी होने वाले नागरिकता रजिस्टर से जो लोग बाहर हो जाएंगे, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके पास अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए 120 दिन में विदेशी ट्राइब्यूनल में अपील करने का अधिकार होगा। उसके बाद भी उच्चतम न्यायलय तक के विकल्प खुले रहेंगे। पिछले साल जारी लिस्ट में 41 लाख लोगों के नाम छूट गए थे। जिनमें बड़ी संख्या मुसलमान व बंगाली हिंदुओं की है।