जीवन को सफल बनाने के लिए इंसान की तरह की जद्दोजद करता है लेकिन फिर भी वह सच्चे जीवन को नहीं पाता है। इंसान के कर्म ही उसके सुख दुख के जिम्मेदार होते हैं। इन सब का हिसाब सूर्य पुत्र शनिदेव रखते हैं। शनिदेव इंसान के कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। शनिदेव कलयुग के न्यायाधीश हैं। उन्हें ग्रह और देवता दोनों की उपाधि प्राप्त है।


शनि देव के माता पिता है ये

बता दें कि कलयुग के साक्षात भगवान का दर्जा उन्हें प्राप्त है। शनिदेव की उपासना से कठिन परिश्रम, अनुशासन, निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि होती है। शनिदेव कर्म प्रधान देवता हैं और उनका न्याय निष्पक्ष होता है। जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा। शनिदेव को पूरे जगत का असाधारण देव माना जाता है। शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र हैं और इनकी माता का नाम छाया है। शनिदेव को मंदा, कपिलाक्क्षार और सौरी नाम से भी जाना जाता है।

जानकारी के लिए बता दें कि शनिदेव भगवान शिव के परम भत्    हैं। भगवान शिव की उपासना से ही उन्होंने नवग्रहों में स्थान पाया है। हनुमान जी ने शनिदेव को रावण की कैद से मुक्त कराया था। हनुमान जी की उपासना करने वाले जातकों को शनिदेव कभी नहीं सताते। शनिदेव की गति मंद है। इसी कारण एक राशि में वह करीब साढ़े सात साल तक रहते हैं। शनिदेव को काला रंग पसंद है इसलिए इनको तेल, काले तिल, काले कपड़े अर्पित किए जाते हैं।