अगर आप प्राइवेट सेक्‍टर में नौकरी करते हैं तब भी सरकार आपको पेंशन की गारंटी देती है।  इसके लिए जरूरी है कि आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के मेंबर हों। अगर आप ईपीएफओ के मेंबर है तोआपको इम्‍पलाइज पेंशन स्‍कीम, 95 के तहत कवर किया जाएगा। एक बार आप इस स्कीम में कवर हो गए तो लगातार 10 साल की सर्विस के बाद आपकी पेंशन पक्की मिल जाएगी। 

कर्मचारी भविष्‍य निधि संगठन EPFO संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को इम्‍पलाईज पेंशन स्‍कीम के तहत पेंशन की सुविधा मुहैया कराता है। ईपीएफ एक्‍ट,1952 के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 12 फीसदी कंट्रीब्‍यूशन उसके पीएफ अकाउंट में जाता है। जबकिे एम्‍पलॉयर के 12 फीसदी कंट्रीब्‍यूशन का 8.33 फीसदी पेंशन फंड में जाता है। इसके अलावा केंद्र सरकार भी कर्मचारी के पेंशन फंड में बेसिक सैलरी का 1.16 फीसदी कंट्रीब्‍यूट करती है। 

इम्‍पलाइज पेंशन स्‍कीम में आने वाला कर्मचारी जब लगातार 10 साल तक सर्विस पूरी कर लेता है तो वह स्‍कीम के तहत आजीवन पेंशन पाने का हकदार हो जाता है। इस बीच कर्मचारी अगर नौकरी बदलता है और पेंशन फंड में कंट्रीब्‍यूशन जारी रहता है तो उसकी सर्विस में कोई व्‍यवधान नहीं माना जाएगा। लेकिन अगर कर्मचारी ने पीएफ और पेंशन फंड से 10 साल पूरा होने से पहले फुल विदड्रॉअल कर लिया तो उसे पेंशन नहीं मिलेगी। 

इम्‍पलाइज पेंशन स्‍कीम के तहत कर्मचारी को 58 साल की उम्र में नौकरी से रिटायर होने पर पेंशन मिलती है। लेकिन कर्मचारी की उम्र 50 साल हो गई है और कर्मचारी कहीं नौकरी नहीं कर रहा है तो वह 50 साल की उम्र में भी पेंशन ले सकता है। यह पेंशन उसको जिंदगी भर मिलेगी।

 

कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्‍नी को घटी हुई पेंशन मिलती है। यहां तक की कर्मचारी के दो बच्‍चे भी 25 साल की उम्र तक पेंशन पा सकते हैं। इसे फैमिली पेंशन कहा जाता है। फैमिली पेंशन के लिए न्‍यूनतम समय तक सर्विस का नियम नहीं है। अगर कर्मचारी की शादी नहीं हुई है तो उसकी मौत होने पर नॉमिनी को आजीवन पेंशन मिलेगी।