तकनीक ने इंसान बेहतर से और बेहरत बन दिया है। तकनीक के खेल से इंसान अपने दिमाग की क्षमता से कई गुना काम ज्याद कर रहा है। हर बात का तोड़ तकनीक के जरीये निकाला जा रहा है। तकनीक ने जीवन में सुगमता तो ला दी है लेकिन इसी से प्रदूषण के कारण कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हो रही है।

आजकल हर कोई बैकपेन या कमर के दर्द से परेशान रहता है। अभी जितनी बीमारियां उतने ही इलाज मेडिकल ने खोज निकाले है। ऐसे ही इलाज के लिए मेडिकल ने एक शोध किया है। काम काज में लोग रीढ़ की हड्डीयों से हमेशा परेशान रहते है। इन लोगों के लिए एक इलाज ढुंढ़ निकाला है। अक्सर जब लोगों को रीढ़ की हड्डी में चोट लगती है तो वह रोजमर्रा की क्रियाओं को नहीं कर पाते हैं।

इस बिमारी के इलाज के लिए वैज्ञानिकों ने रीढ़ की हड्डी में क्षतिग्रस्त ऊतक को पुन: उत्पन्न करने के लिए एक नई जीन थेरेपी का अध्ययन किया है। जिसकी तकनीक इतनी अच्छी की इसे चालू या बंद भी किया जा सकता है। इसे एक आम एंटीबायोटिक का उपयोग करके ऑन ऑफ किया जा सकता है जिससे रीढ़ की हड्डी के मरीज को आराम मिलेगा।

इसकी खास बात ये है कि ये जीन थेरेपी रीढ़ की हड्डी का एक अनोखा तरीका प्रदान करती है। और इस जीन थेरेपी की खास बात ये है इसका स्विच  है जिससे जरूरत होने पर बंद भी कर सकते हैं। जब इंसान रीढ़ की हड्डी की चोट लगती है तो उसके घने ऊतक के रूप में जो तंत्रिका कोशिकाओं के बीच नए कनेक्शन को रुक जाता  है।