अगर भारतीय जीवन बीमा नियामक अपने रिवाइज्ड प्रस्ताव को अंतिम रूप दे देता है तो 30 जून के बाद आप स्टैंडर्ड कोविड-19 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीद सकेंगे। मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में इस बारे में जानकारी दी है। इंश्योरेंस रेग्युलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) की एक ड्राफ्ट कॉपी से इस बारे में जानकारी मिलती है। नये प्रस्ताव के तहत कोविड-19 हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नुकसान से सुरक्षा आधारित नहीं बल्कि बेनिफिट आधारित प्रोडक्ट होगा।


इस प्रस्ताव के तहत अगर पॉलिसीहोल्डर कोविड-19 की जांच के बाद अस्पताल में भर्ती होता है तो लम्प-सम 100 फीसदी रकम इंश्योर्ड होगी। ड्राफ्ट के तहत इलाज स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा अधिकृत सेंटर में होनी चाहिए।


इसके अतिरिक्त, पॉलिसीहोल्डर इस पॉलिसी के साथ एक वैकल्पिक ऐड-ऑन भी खरीद सकता है। इस ऐड-ऑन के तहत ​अगर पॉलिसीहोल्डर केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिकृत मेडिकल प्रैक्टिसनर के कहने पर क्वारंटीन होता है तो उन्हें बेस इंश्योर्ड रकम का 50 फीसदी मिल सकेगा। हालांकि, इस प्लान में होम क्ववारंटीन व आइसोलेशन को कवर नहीं किया जायेगा। इस प्रस्ताव के अनुसार, 'बेस कवर और ऐड-ऑन कवर के तहत पॉलिसी की अवधि के दौरान भुगतान की रकम बेस इंश्योर्ड रकम के 100 फीसदी से अधिक नहीं हो सकती है।'


अगर इस प्रस्ताव को मौजूदा प्रावधानों के साथ अंतिम रूप दे दिया जाता है तो जनरल और स्टैंडअलोन हेल्थ इंश्योरर्स द्वारा यह प्रोडक्ट 30 जून 2020 के बाद उपलब्ध हो सकती है। इसमें 15 दिन का वेटिंग पीरियड भी शामिल होगा, जिसके तहत पॉलिसी खरीदने के 15 दिन के अंदर किये क्लेम्स को प्रोसेस नहीं किया जायेगा।


इस इंश्योरेंस के लिए बेस रकम 50 हजार रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक की हो सकती है, जिसका लाभ 18 साल से लेकर 65 साल की आयु का कोई भी व्यक्ति ले सकता है। अगर आप फैमिली फ्लोटर प्लान को चुनते हैं तो इसमें आप पति/पत्नी, निर्भर बच्चे, माता/पिता, सास-ससुर को कवर कर सकते हैं। प्रोडक्ट स्ट्रक्चर सभी कंपनियों का एक जैसा ही होगा, लेकिन प्रीमियम तय करने को लेकर कंपनियां स्वतंत्रा होंगी।


इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा कुछ सवाल उठाने के बाद IRDAI ने ओरिजिनल ड्राफ्ट में कुछ फीचर्स को रिवाइज किया है। एक प्राइवेट बीमा कंपनी के अधिकारी ने मनीकंट्रोल को बताया कि उन्होंने पहले ड्राफ्ट के लिये फीडबैक में सुझाव दिया था कि ​स्टैंडर्ड आरोग्य संजीवनी पॉलिसी के तहत वो नुकसान से सुरक्षा के आधार फिक्सड बेनिफिट प्रोडक्ट पहले ही चलाते हैं। एक प्रिंसिपल पर आधारित दो प्रोडक्ट्स से कन्फ्यूज़न की स्थिति पैदा होगी। नुकसान से सुरक्षा प्लान के तहत इंश्योरेंस कंपनियां अस्पताल के खर्च का भुगतान करती हैं।


संभव है कि इस ड्राफ्ट में अभी भी बदलाव हो सकते हैं। कुछ बीमा कंपनियों का कहना है कि मौजूदा समय में 5 लाख रुपये की अधिकतम बेस रेट बेनिफिट कवर के लिए ज्यादा है। साथ ही, 15 दिन का वेटिंग पीरियड बहुत कम है। ज़ोन के आधार प्राइसिंग पर कोई व्यवस्था न होना भी एक मसला है। उदाहरण के तौर पर मुंबई में अस्पतालों के खर्चे टियर-2 या​ टियर-3 शहरों की तुलना में कहीं ज्यादा होगा। ऐसे में इंश्यसोरेंस कंपनियों द्वारा इस आधार पर भी प्रीमियम चार्ज करने के प्रावधान की जरूरत है।