दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने पर हर घर को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का वादा किया। हालांकि, अगर बिजली का बिल 300 यूनिट से अधिक होता है तो आपको 300 यूनिट मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी और पूरा भुगतान करना होगा। केजरीवाल का दावा है कि इससे लोग बिजली बचाने के लिए प्रोत्साहित होंगे, क्योंकि उनके पैसे भी बचेंगे। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसके चलते ये लुभावने वादे किए जा रहे हैं। बेशक अरविंद केजरीवाल का ये वादे बहुत ही लुभावना है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर इससे सरकार पर कितना बोझ पड़ेगा। आइए जानते हैं।

अरविंद केजरीवाल की 300 यूनिट मुफ्त बिजली की घोषणा का मतलब है कि सरकार पर करीब 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान है। मौजूदा समय में पंजाब सरकार की तरफ से लोगों को बिजली पर करीब 10,668 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जाती है। ऐसे में अगर 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाने लगी तो इससे यह आंकड़ा 15 हजार करोड़ का स्तर भी पार कर जाएगा। यानी करीब 5000 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा।

पंजाब में करीब 80 लाख पावर कंज्यूमर्स हैं, जिनमें से 50 फीसदी लोगों को पहले ही सब्सिडी मिल रही है। अगर केजरीवाल की सरकार पंजाब में बनी तो हर किसी को सब्सिडी मिलने लगेगी। अगर ऐसा हो जाता है तो पंजाब में पूरे देश में सबसे अधिक सब्सिडी मिलेगी। अभी करीब 6,735 करोड़ रुपये की बिजली सब्सिडी किसानों को मिल रही है। वहीं एससी/बीसी/बीपीएल को 200 यूनिट मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिससे करीब 1627 करोड़ रुपये का बोझ सरकार पर पड़ता है। अभी मुफ्त 200 यूनिट बिजली पाने वालों की संख्या करीब 15 लाख है।

दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार मुफ्त बिजली की सब्सिडी की भरपाई बिजली चोरी से होने वाले नुकसान को बचाकर कर रही है। दिल्ली में अभी 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलती है और उसके ऊपर 201-400 यूनिट तक के बिल पर 50 फीसदी की सब्सिडी मिलती है। बात अगर 2019-20 के करें तो दिल्ली में करीब 47 लाख बिजली के कनेक्शन हैं और इन सभी को बिजली की सब्सिडी देने में सरकार को करीब 1700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।