कक्षा 12 वीं में 89.4 प्रतिशत अंक पाने के बाद भी लोंगसाम सापोंग आगे की पढ़ाई के लिए बहुत बड़े ख्वाब नहीं थे। परिवार की आर्थिक स्थिति और अभाव के चलते उसने अपने सपनों को भी दबा लिया। लेकिन नियति शायद इतनी भी कठोर नहीं रहती। ऐसा इसलिए क्योंकि अरूणाचल के एक आईएएस ऑफिसर ने एक सराहनीय कदम उढ़ाया और लोंगसाम समेत दो अन्य बच्चों को उनके सपने के थोड़ा और नजदीक पहुंचा दिया। इस ऑफिसर ने क्राउड फंडिंग करके इन बच्चों को दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक का पढ़ाई के लिए जाने के सारे इंतजाम कर दिये।

छांगलांग के डिप्टी कमिश्नर, देवांश यादव ने बताया कि "तिरप, छांगलांग और लोंगडिंग जिलों में अरुणाचल की 10 प्रतिशत आबादी होने के बाद भी, राज्य लोक सेवाओं में यहां के लोगों की बस 2 प्रतिशत भागीदारी ही है। ये जिले इंसर्जेंसी से भी प्रभावित हैं और यहां शिक्षा और रोजगार के बहुत कम अवसर हैं।" उन्होंने ये भी कहा कि "पर्याप्त सलाह और आर्थिक कमियों की वजह से यहां के प्रतिभाशाली छात्र राज्य के बाहर पढ़ने नहीं जा पाते हैं।  इसलिए हमने ये पहल की है।" 

महिला एवं बाल विकास विभाग में काम करने वाली बुनेम तंघा के साथ मिलकर आईएएस यादव ने ऐसे बच्चों को ढूंढ़ा जिन्हें उच्च शिक्षा लेने के लिए आर्थिक मदद की जरूर थी। आपको बता दें कि बुनेम ने स्वयं दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई की है।  बुनेम ने 6 बच्चे ढूंढ़े, जिनमें से 3 जिले के टॉपर थे। लोंगसाम सापोंग (89.4 प्रतिशत), सेंथुंग यांगचांग (89.2 प्रतिशत), लीचा हैसा (80.6 प्रतिशत) को चुना गया। श्री यादव और बुनेम की मदद से इन बच्चों को दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान ऑनर्स कोर्स में दाखिला मिल गया है। आगे की पढ़ाई ये अब वहीं करेंगे।

बुनेम बताती हैं कि "बच्चों को ढूंढना तो आसान था लेकिन अनके परिवारजनों और उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय में अप्लाई करने के लिए मनाना मुश्किल था। लीचा और सेंथुंग जो कि दो लड़कियां हैं दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ होने वाले क्राइम को लेकर भी परेशान थीं।" बुनेम ने कहा कि "लेकिन मैंने उन्हें अपना उदाहरण दिया और बताया कि कैसे डीयू में पढ़ने से उन्हें बेहतर अवसर मिल सकेंगे और वे अपने परिवार की भी मदद कर सकेंगी। मैंने उन्हें फायदे और नुकसान दोनों ही बताए।"

सापोंग का परिवार खेती का काम करता है। वह अरुणाचल की राजधानी ईटानगर के ही एक कॉलेज में दाखिला लेने की तैयारी कर रहा था लेकिन अब डीयू के दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्टस एंड कॉमर्स में दाखिला मिलने के बाद वह दिल्ली में पढ़ाई करेगा। सेंथुंग की मां चांगलांग में छोटी सी किराने की दुकान चलाती हैं। सेंथुंग ने बताया कि "मैं गुवाहटी में पढ़ाई करने की तैयारी कर रही थी। दिल्ली के बारे में खबरें पढ़कर मुझे डर लगता था कि वो महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है। लेकिन तंघा मैम ने मुझे समझाया और अब मैं वहां जाकर पढ़ाई करूंगी।"

आईएएस यादव ने इन तीन बच्चों के लिए छात्रावास की भी व्यवस्था करवा दी है। लेकिन फीस, आने-जाने और खान-पान के लिए रकम जुटाने के लिए 26 अक्टूबर को ट्विटर के माध्यम से उन्होंने क्राउड फंडिंग की मुहिम चलाई थी।