अधिकांश भारतीयों ने केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल को अपना समर्थन दिया है। उनका मानना है कि इससे देश की स्थिति में सुधार होगा। एक पोल के अनुसार 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि नए मंत्रिमंडल के आने से देश में स्थिति में सुधार होगा जबकि 41 प्रतिशत लोगों का मानना है कि स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा। सर्वेक्षण का सैंपल साइज 1200 है और यह सभी क्षेत्रों में वयस्क उत्तरदाताओं के साथ साक्षात्कार पर आधारित है।

हालांकि, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को कैबिनेट से हटाए जाने की बात लोगों को रास नहीं आई है। आधे से अधिक या 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि कोविड-19 के दौरान लोगों की कठिनाइयों के लिए हर्षवर्धन अकेले जिम्मेदार नहीं हैं और उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है। 29 प्रतिशत हालांकि इस धारणा से असहमत दिखे। नए रेल और आईटी मंत्री के रूप में सामने आए अश्विनी वैष्णव सहित कई पूर्व नौकरशाह नए कैबिनेट में शामिल हुए। इस पर 45 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि एक पूर्व अधिकारी एक बेहतर मंत्री साबित हो। 42 प्रतिशत ने माना कि पूर्व अधिकारी एक बेहतर मंत्री साबित हो सकता है।

नए मंत्रियों के आने के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में किसी भी तरह की राहत की उम्मीद कम है। 55 प्रतिशत ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्री को हटाने और हरदीप पुरी को इस पद पर नियुक्त करने से पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों पर रोक नहीं लगेगी जबकि 34 प्रतिशत मानते हैं कि इस पर रोक सम्भव है। एक नए शिक्षा मंत्रालय को लेकर सकारात्मक रुख देखा गया है,। 52 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा है कि इससे देश में शिक्षा की स्थिति में सुधार होगा जबकि 35 प्रतिशत इससे असहमत दिखे।यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के लिए अच्छी खबर है क्योंकि अधिकांश लोगों को लगता है कि वह 2022 में भी उत्तर प्रदेश चुनाव जीतेंगे। 52 प्रतिशत लोग मानते हैं कि राज्य में कोविड महामारी से निपटने में विफल रहने के बावजूद योगी यूपी का चुनाव जीतेंगे। सर्वेक्षण के अनुसार, 49 प्रतिशत उत्तरदाता मानते हैं कि भारत के लिए अमेरिका अधिक भरोसेमंद भागीदार है जबकि सिर्फ 29 फीसदी ईरान को इस नजर से देखते हैं।