राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के 31 अगस्त को पब्लिश किए जाने के बाद से ही असम के पड़ोसी पूर्वोत्तर राज्यों ने पिछले एक महीने से अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है। ये निगरानी खासकर उन लोगों पर है जो बिना किसी कागजात के इन पड़ोसी राज्यों में प्रवेश कर रहे हैं। 

मेघालय जाने के लिए पहचान पत्र जरूरी है ताकि ये निर्धारित हो सके कि वह व्यक्ति भारत का ही नागरिक है। वहीं, मिजोरम में एंट्री के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत है। ये परमिट केवल राज्य सरकार की तरफ से उन लोगों को दिया जाता है जिनके नाम एनआरसी में है। बता दें कि असम में एनआरसी की सूची आने के बाद 19,06,657 लोगों के नाम उसमें नहीं हैं। 

मेघालय पुलिस के आंकड़े के मुताबिक, 1329 लोगों को राज्य की सीमा से वापस भेज दिया गया जिनके पास भारतीय होने का प्रमाण मौजूद नहीं था। मेघालय के सीएम कोनराड संगमा ने सितंबर में गुवाहाटी में एक बैठक के दौरान गृहमंत्री अमित शाह को बताया था कि जिनके नाम एनआरसी में नहीं हैं, उनके मेघालय में घुसने की आशंका है।  मेघालय के मुख्यमंत्री की इन चिंताओं पर अमित शाह ने कहा था, मैं बताना चाहता हूं कि एक भी घुसपैठिए को असम या फिर किसी दूसरे राज्य में प्रवेश की इजाजत नहीं मिल सकती है। हम केवल असम को घुसपैठियों से मुक्त नहीं कराना चाहते बल्कि पूरे देश को उनसे आजादी दिलाना चाहते हैं और जब मैं पूरे देश कहता हूं तो इसमें पूर्वोत्तर के राज्य भी शामिल हैं। 

पिछले साल जब एनआरसी ड्राफ्ट जारी हुआ था तो खासी स्टूडेंट यूनियन (केएसयू) ने आरोप लगाते हुए खुद ही निगरानी शुरू कर दी थी कि राज्य इस मामले में तत्परता से काम नहीं कर रहा है। बवाल बढ़ने के बाद जब राज्य पुलिस हरकत में आई तो केएसयू के इन चेक गेट्स को हटा लिया गया था।